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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 217, कुल 504 में से

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पृष्ठ 217

श्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19
दादू जल दल राम का, हम लेवैं परसाद ।
संसार का समझैं नहीं, अविगत भाव अगाध ॥ 29 ॥
परमेश्वर के भाव का, एक कणूँका खाइ ।
दादू जेता पाप था, भ्रम कर्म सब जाइ ॥ 30 ॥
दादू कौण पकावै, कौण पीसै, जहाँ तहाँ सीधा ही दीसै ॥ 31 ॥
दादू जे कुछ खुसी खुदाइ की, होवेगा सोई ।
पच पच कोई जनि मरै, सुन लीज्यो लोई ॥ 32 ॥
दादू छूट खुदाइ कहीं को नांही, फिरिहो पृथ्‍वी सारी ।
दूजी दहन दूर कर बौरै, साधू शब्द विचारी ॥ 33 ॥
दादू बिना राम कहीं को नांही, फिरिहो देश विदेसा ।
दूजी दहन दूर कर बौरै, सुनि यहु साधु संदेशा ॥ 34 ॥
दादू सिदक सबूरी साच गह, साबित राख यकीन ।
साहिब सौं दिल लाइ रहु, मुरदा ह्वै मसकीन ॥ 35 ॥
दादू अनवांछित टूका खात हैं, मर्महि लागा मन ।
नाम निरंजन लेत हैं, यों निर्मल साधु जन ॥ 36 ॥
अनबांछा आगे पड़े, खिरा विचार रू खाइ ।
दादू फिरै न तोड़ता, तरुवर ताक न जाइ ॥ 37 ॥
अनबांछा आगे पड़े, पीछे लेइ उठाइ ।
दादू के सिर दोष यहु, जे कुछ राम रजाइ ॥ 38 ॥
अनबांछी अजगैब की, रोजी गगन गिरास ।
दादू सत करि लीजिये, सो सांई के पास ॥ 39 ॥
कर्त्ता कसौटी
मीठे का सब मीठा लागै, भावै विष भर देइ ।
दादू कड़वा ना कहै, अमृत कर कर लेइ ॥ 40 ॥

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