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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 219, कुल 504 में से

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पृष्ठ 219

श्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19
विश्वास-संतोष
दादू कर्त्ता हम नहीं, कर्त्ता औरै कोइ।
कर्त्ता है सो करेगा, तूं जनि कर्त्ता होइ ॥ 52 ॥
हरि भरोसा
काशी तज मगहर गया, कबीर भरोसे राम।
सैंदेही सांई मिल्या, दादू पूरे काम ॥ 53 ॥
दादू रोजी राम है, राजिक रिजक हमार।
दादू उस प्रसाद सौं, पोष्या सब परिवार ॥ 54 ॥
पंच संतोषे एक सौं, मन मतिवाला मांहि।
दादू भागी भूख सब, दूजा भावै नांहि ॥ 55 ॥
दादू साहिब मेरे कापड़े, साहिब मेरा खाण।
साहिब सिर का ताज है, साहिब पिंड प्राण ॥ 56 ॥
विनती
सांई सत संतोष दे, भाव भक्ति विश्वास।
सिदक सबूरी साँच दे, माँगे दादू दास ॥ 57 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
उन्नीसवां विश्वास का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 19 ॥ साखी 57 ॥

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