सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19
गोविन्द के गुण चिंत कर, नैन, बैन, पग, शीश।
जिन मुख दिया कान, कर प्राणनाथ जगदीश ॥ 17 ॥
तन मन सौंज सँवार सब, राखै बिसवा बीस।
सो साहिब सुमिरै नहीं, दादू भान हदीस ॥ 18 ॥
दादू सो साहब जनि विसरै, जिन घट दिया जीव।
गर्भवास में राखिया, पालै पोषै पीव ॥ 19 ॥
दादू राजिक रिजक लिये खड़ा, देवे हाथों हाथ।
पूरक पूरा पास है, सदा हमारे साथ ॥ 20 ॥
हिरदै राम सँभाल ले, मन राखै विश्वास।
दादू समर्थ सांइयां, सब की पूरै आस ॥ 21 ॥
दादू सांई सबन को, सेवक ह्वै सुख देइ।
अया मूढ मति जीव की, तो भी नाम न लेइ ॥ 22 ॥
दादू सिरजनहारा सबन का, ऐसा है समरथ।
सोई सेवक ह्वै रह्या, जहाँ सकल पसारैं हत्थ ॥ 23 ॥
समर्थ साक्षीभूत
धनि धनि साहिब तू बड़ा, कौन अनुपम रीत।
सकल लोक सिर सांइयां, ह्वै कर रह्या अतीत ॥ 24 ॥
दादू हौं बलिहारी सुरति की, सबकी करै सँभाल।
कीड़ी कुंजर पलक में, करता है प्रतिपाल ॥ 25 ॥
विश्वास
दादू छाजन भोजन सहज में, संइयाँ देइ सो लेइ।
तातैं अधिका और कुछ, सो तूं कांई करेइ ॥ 26 ॥
दादू टूका सहज का, संतोषी जन खाइ।
मृतक भोजन, गुरुमुखी काहे कलपै जाइ ॥ 27 ॥
दादू भाड़ा देह का, तेता सहज विचार।
जेता हरि बिच अंतरा, तेता सबै निवार ॥ 28 ॥
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