सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-विश्वास का अंग 19
दादू सोई हमारा सांइयां, जे सबका पूरणहार ।
दादू जीवन मरण का, जाके हाथ विचार ॥ 5 ॥
दादू स्वर्ग भुवन पाताल मधि, आदि अंत सब सृष्ट ।
सिरज सबन को देत है, सोई हमारा इष्ट ॥ 6 ॥
दादू करणहार कर्त्ता पुरुष, हमको कैसी चिंत ।
सब काहू की करत है, सो दादू का मिंत ॥ 7 ॥
दादू मनसा वाचा कर्मणा, साहिब का विश्वास ।
सेवक सिरजनहार का, करे कौन की आस ? 8 ॥
शर्म न आवै जीव को, अनकिया सब होइ ।
दादू मारग मिहर का, बिरला बूझै कोइ ॥ 9 ॥
दादू उद्यम औगुण को नहीं, जे कर जाणै कोइ ।
उद्यम में आनन्द है, जे सांई सेती होइ ॥ 10 ॥
दादू पूरणहारा पूरसी, जो चित रहसी ठाम ।
अन्तर तैं हरि उमग सी, सकल निरंतर राम ॥ 11 ॥
पूरक पूरा पास है, नाहीं दूर, गँवार ।
सब जानत हैं, बावरे ! देबे को हुसियार ॥ 12 ॥
दादू चिन्ता राम को, समर्थ सब जाणै ।
दादू राम संभाल ले, चिंता जनि आणै ॥ 13 ॥
दादू चिन्ता कियां कुछ नहीं, चिंता जीव को खाइ ।
होना था सो ह्वै रह्या, जाना है सो जाइ ॥ 14 ॥
प्रतिपाल
दादू जिन पहुँचाया प्राण को, उदर उर्ध्व मुख खीर ।
जठर अग्नि में राखिया, कोमल काया शरीर ॥ 15 ॥
दादू समर्थ संगी संग रहै, विकट घाट घट भीर ।
सो सांई सूं गहगही, जनि भूलै मन बीर ॥ 16 ॥
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