सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
बासण विषय विकार के, तिनको आदर मान ।
संगी सिरजनहार के, तिन सौं गर्व गुमान ॥ 127 ॥
अंधे को दीपक दिया, तो भी तिमिर न जाय ।
सोधी नहीं शरीर की, तासन का समझाइ ॥ 128 ॥
सगुरा निगुरा
दादू कहिए कुछ उपकार को, मानै अवगुण दोष ।
अंधे कूप बताइया, सत्य न मानै लोक ॥ 129 ॥
कालर खेत न नीपजै, जे बाहे सौ बार ।
दादू हाना बीज का, क्या पचि मरै गँवार ॥ 130 ॥
कृत्रिम कर्ता
दादू जिन कंकर पत्थर सेविया, सो अपना मूल गँवाइ ।
अलख देव अंतर बसै, क्या दूजी जगह जाइ ॥ 131 ॥
पत्थर पीवे धोइ कर, पत्थर पूजे प्राण ।
अन्तकाल पत्थर भये, बहु बूडे इहि ज्ञान ॥ 132 ॥
कंकर बंध्या गांठड़ी, हीरे के विश्वास ।
अंतकाल हरि जौहरी, दादू सूत कपास ॥ 133 ॥
दादू पहली पूजे ढूंढसी, अब भी ढूंढस बाणि ।
आगे ढूंढस होइगा, दादू सत्य कर जाणि ॥ 134 ॥
भ्रम विध्वंसण
दादू पैंडे पाप के, कदे न दीजे पांव ।
जिहिं पैंडे मेरा पीव मिले, तिहिं पैंडे का चाव ॥ 135 ॥
दादू सुकृत मारग चालतां, बुरा न कबहुँ होइ ।
अमृत खातां प्राणिया, मुवा न सुनिया कोइ ॥ 136 ॥
कुछ नाहीं का नाम क्या, जे धरिये सो झूठ।
सुर नर मुनिजन बंधिया, लोका आवट कूट ॥ 137 ॥
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