सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
सत्य असत्य गुरु पारख लक्षण
आई रोजी ज्यों गई, साहिब का दीदार।
गहला लोगों कारणैं, देखै नहीं गँवार ॥ 116 ॥
पतिव्रत निष्काम
दादू सोई सेवक राम का, जिसे न दूजी चिंत।
दूजा को भावै नहीं, एक पियारा मिंत ॥ 117 ॥
भ्रम विध्वंसण
अपनी अपनी जाति सौं, सब को बैसैं पांति।
दादू सेवग राम का, ताके नहीं भरांति ॥ 118 ॥
चोर अन्याई मसखरा, सब मिलि बैसैं पांति।
दादू सेवक राम का, तिन सौं करें भरांति ॥ 119 ॥
दादू सूप बजायां क्यों टलै, घर में बड़ी बलाइ।
काल झाल इस जीव का, बातन ही क्यों जाइ?120 ॥
साँप गया सहनाण को, सब मिलि मारैं लोक।
दादू ऐसा देखिए, कुल का डगरा फोक ॥ 121 ॥
दादू दोन्यूँ भरम हैं, हिन्दू तुरक गंवार।
जे दुहुवाँ थैं रहित है, सो गहि तत्त्व विचार ॥ 122 ॥
अपना अपना कर लिया, भंजन माँही बाहि।
दादू एकै कूप जल, मन का भ्रम उठाहि ॥ 123 ॥
दादू पानी के बहु नाम धर, नाना विधि की जात।
बोलणहारा कौन है, कहो धौं कहाँ समात ॥ 124 ॥
जब पूरण ब्रह्म विचारिये, तब सकल आत्मा एक।
काया के गुण देखिये, तो नाना वरण अनेक ॥ 125 ॥
अमिट पाप प्रचण्ड
भाव भक्ति उपजै नहीं, साहिब का प्रसंग।
विषय विकार छूटै नहीं, सो कैसा सत्संग ॥ 126 ॥
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