सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
अनाधिकारी
दादू कथनी और कुछ, करणी करैं कछु और।
तिन थैं मेरा जीव डरै, जिनके ठीक न ठौर ॥ 106 ॥
अन्तरगत औरै कछु, मुख रसना कुछ और।
दादू करणी और कुछ, तिनको नांही ठौर ॥ 107 ॥
मन प्रबोध
दादू राम मिलन की कहत हैं, करते कुछ औरे।
ऐसे पीव क्यौं पाइये, समझि मन बौरे ॥ 108 ॥
बेखर्च व्यसनी
दादू बगनी भंगा खाइ कर, मतवाले माँझी।
पैका नांही गांठड़ी, पातशाह खांजी ॥ 109 ॥
दादू टोटा दालिदी, लाखों का व्यौपार।
पैका नांही गांठड़ी, सिरै साहूकार ॥ 110 ॥
मध्य निष्पक्ष-सब मतों का निशाना एक
दादू ये सब किसके पंथ में, धरती अरु आसमान।
पानी पवन दिन रात का, चंद सूर रहमान ॥ 111 ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश का, कौन पंथ गुरुदेव।
सांई सिरजनहार तूं, कहिये अलख अभेव ॥ 112 ॥
मुहम्मद किसके दीन में, जिब्राईल किस राह?
इनके मुर्शिद पीर की, कहिये एक अल्लाह ॥ 113 ॥
दादू ये सब किसके ह्वै रहे, यहु मेरे मन माँहि।
अलख इलाही जगत-गुरु, दूजा कोई नांहि ॥ 114 ॥
पतिव्रत व्यभिचार
दादू औरैं ही औला तके, थीयां सदै बियंनि।
सो तू मीयां ना घुरै, जो मीयां मीयंनि ॥ 115 ॥
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