सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
खंड खंड कर ब्रह्म को, पख पख लीया बाँट।
दादू पूरण ब्रह्म तज, बँधे भरम की गाँठ ॥ 50 ॥
मन विकार औषधि
जीवत दीसै रोगिया, कहैं मूवां पीछे जाइ।
दादू दुँह के पाठ में, ऐसी दारू लाइ ॥ 51 ॥
सो दारू किस काम की, जाथैं दर्द न जाइ।
दादू काटै रोग को, सो दारू ले लाइ ॥ 52 ॥
दादू अनुभव काटै रोग को, अनहद उपजै आइ।
सेझे का जल निर्मला, पीवै रुचि ल्यौ लाइ ॥ 53 ॥
सोई अनुभव सोई ऊपजी, सोई शब्द तत सार।
सुनतां ही साहिब मिलै, मन के जाहिं विकार ॥ 54 ॥
चानक उपदेश
औषध खाइ न पथ्य रहै, विषम व्याधि क्यों जाइ।
दादू रोगी बावरा, दोष बैद को लाइ ॥ 55 ॥
एक सेर का ठांवड़ा, क्योंही भऱ्या न जाइ।
भूख न भागी जीव की, दादू केता खाइ ॥ 56 ॥
पशुवां की नांई भर भर खाइ, व्याधि घणेरी बधती जाइ।
पशुवां नांई करै अहार, दादू बाढै रोग अपार ॥ 57 ॥
राम रसायन भर भर पीवै, दादू जोगी जुग जुग जीवै।
संयम सदा, न व्यापै व्याधी, रहै निरोगी लगै समाधी ॥ 58 ॥
शिश्न श्वास
दादू चारै चित दिया, चिन्तामणि को भूल।
जन्म अमोलक जात है, बैठे माँझी फूल ॥ 59 ॥
भरी अधौड़ी भावठी, बैठा पेट फुलाइ।
दादू शूकर स्वान ज्यों, ज्यों आवै त्यों खाइ ॥ 60 ॥
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