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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 504 में से

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पृष्ठ 166

श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
आवट कूटा होत है, अवसर बीता जाइ ।
दादू कर ले बंदगी, राखणहार खुदाइ ॥ 38 ॥
इस कलि केते ह्वै गये, हिंदू मुसलमान ।
दादू सांची बंदगी, झूठा सब अभिमान ॥ 39 ॥
कथनी बिना करणी
पोथी अपना पिंड कर, हरि यश माँहीं लेख ।
पंडित अपना प्राण कर, दादू कथहु अलेख ॥ 40 ॥
काया कतेब बोलिए, लिख राखूं रहमान ।
मनवा मुल्लां बोलिये, श्रोता है सुबहान ॥ 41 ॥
दादू काया महल में नमाज गुजारूं, तहँ और न आवन पावै ।
मन मणके कर तसबीह फेरूं, तब साहिब के मन भावै ॥ 42 ॥
दिल दरिया में गुसल हमारा, ऊजू कर चित लाऊँ ।
साहिब आगेकरूं बंदगी, बेर बेर बलि जाऊँ ॥ 43 ॥
दादू पंचों संग संभालूं सांई, तन मन तब सुख पाऊँ।
प्रेम पियाला पिवजी देवै, कलमा ये लै लाऊँ ॥ 44 ॥
शोभा कारण सब करै, रोजा बांग नमाज ।
मुवा न एकौ आह सौं, जे तुझ साहिब सेती काज ॥ 45 ॥
हर रोज हजूरी होइ रहु, काहे करै कलाप ।
मुल्ला तहाँ पुकारिये, जहाँ अर्श इलाही आप ॥ 46 ॥
हरदम हाजिर होना बाबा, जब लग जीवै बंदा ।
दायम दिल सांई सौं साबित, पंच वक्त क्या धंधा ॥ 47 ॥
हिंदू मुसलमानों का भ्रम
दादू हिंदू मारग कहैं हमारा, तुरक कहैं रह मेरी ।
कहाँ पंथ है कहो अलह का? तुम तो ऐसी हेरी ॥ 48 ॥
दादू दुई दरोग लोग को भावै, सांई को साँच पियारा ।
कौन पंथ हम चलैं कहो धू, साधो करो विचारा ॥ 49 ॥

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