सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 165, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
दादू नफ्स नाम सौं मारिये, गोशमाल दे पंद।
दूई है सो दूरि कर, तब घर में आनन्द ॥ 27 ॥
सच्चे मुसलमान के लक्षण
मुसलमान जो राखे मान, सांई का माने फरमान।
सारों को सुखदाई होइ, मुसलमान कर जानूँ सोइ ॥ 28 ॥
दादू मुसलमान महर गह रहै, सबको सुख, किसही नहिं दहै।
मुवा न खाइ, जीवत नहिं मारै, करै बंदगी, राह संवारै ॥ 29 ॥
सो मोमिन मन मे कर जान, सत्य सबूरी बैसे आन।
चलै साच सँवारे बाट, तिनको खुले बहिश्त के पाट ॥ 30 ॥
सो मोमिन मोम दिल होइ, सांई को पहचानै सोइ।
जोर न करै हराम न खाइ, सो मोमिन बहिश्त में जाइ ॥ 31 ॥
जो हम नहीं गुजारते, तुम्ह को क्या भाई।
सीर नहीं कुछ बंदगी, कहु क्यों फरमाई ॥ 32 ॥
अपने अमलों छूटिये, काहू के नाहीं।
सोई पीड़ पुकार सी, जा दूखै माहीं ॥ 33 ॥
कोई खाइ अघाइ करि, भूखे क्यों भरिये।
खूटी पूगी आन की, आपण क्यों मरिये ॥ 34 ॥
फूटी नाव समंद में, सब डूबन लागे।
अपना अपना जीव ले, सब कोई भागे ॥ 35 ॥
दादू शिर शिर लागी आपने, कहु कौण बुझावै।
अपना अपना साच दे, सांई को भावै ॥ 36 ॥
सुमिरण नाम चितावनी
साचा नाम अल्लाह का, सोई सत्य कर जाण।
निश्चल कर ले बंदगी, दादू सो परमाण ॥ 37 ॥
- 165 -