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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 160, कुल 504 में से

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पृष्ठ 160

श्री दादूवाणी-माया का अंग 12
दादू बाँधे वेद विधि, भरम करम उरझाइ ।
मर्यादा माँही रहै, सुमिरण किया न जाइ ॥ 158 ॥
माया नगरी दोष निरूपण
दादू माया मीठी बोलणी, नइ नइ लागै पाइ ।
दादू पैसि पेट में, काढ कलेजा खाइ ॥ 159 ॥
नारी नागिन जे डसे, ते नर मुये निदान ।
दादू को जीवै नहीं, पूछो सबै सयान ॥ 160 ॥
नारी नागिन एक सी, बाघिन बड़ी बलाइ ।
दादू जे नर रत भये, तिनका सर्वस खाइ ॥ 161 ॥
नारी नैन न देखिये, मुख सौं नाम न लेइ ।
कानों कामिनि जनि सुणै, यहु मन जाण न देइ ॥ 162 ॥
सुन्दरी खाये साँपिनी, केते इहि कलि माँहि ।
आदि अन्त इन सब डसे, दादू चेते नांहि ॥ 163 ॥
दादू पैसै पेट में, नारी नागिन होइ ।
दादू प्राणी सब डसे, काढ सकै न कोइ ॥ 164 ॥
माया सांपिनी सब डसे, कनक कामिनी होइ ।
ब्रह्मा विष्णु महेश लौं, दादू बचै न कोइ ॥ 165 ॥
माया मारै जीव सब, खंड खंड कर खाइ ।
दादू घट का नास कर, रोवै जग पतियाइ ॥ 166 ॥
बाबा बाबा कहि गिलै, भाई कहि कहि खाइ ।
पूत पूत कहि पी गई, पुरुषा जनि पतियाइ ॥ 167 ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश की, नारी माता होइ ।
दादू खाये जीव सब, जनि रु पतीजै कोइ ॥ 168 ॥
माया बहुरूपी नटणी नाचै, सुर नर मुनि को मोहै ।
ब्रह्मा विष्णु महादेव बाहे, दादू बपुरा को है ॥ 169 ॥

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