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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 161, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-माया का अंग 12
माया फाँसी हाथ ले, बैठी गोप छिपाहि ।
जे कोई धीजे प्राणियां, ताही के गल बाहि ॥ 170 ॥
पुरुषा फाँसी हाथ कर, कामिनि के गल बाहि ।
कामिनि कटारी कर गहै, मार पुरुष को खाहि ॥ 171 ॥
नारी बैरिन पुरुष की, पुरुषा बैरी नार।
अंत काल दोन्यूं मुये, दादू देख विचार ॥ 172 ॥
नारी पुरुष को ले मुई, पुरुषा नारी साथ।
दादू दोनों पच मुये, कछू न आया हाथ ॥ 173 ॥
नारी पीवै पुरुष को, पुरुष नारी को खाइ ।
दादू गुरु के ज्ञान बिन, दोनों गये विलाइ ॥ 174 ॥
भँवरा लुब्धी बास का, कमल बँधाना आइ ।
दिन दश माँहैं देखतां, दोनों गये विलाइ ॥ 175 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
बारहवां माया कअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 12 ॥ साखी 175 ॥

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