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सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 112, कुल 504 में से

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पृष्ठ 112

अथ लै का अंग ७
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥
लय का स्वरूप लक्षण
दादू लै लागी तब जाणिये, जे कबहुँ छूट न जाइ ।
जीवत यों लागी रहै, मूवां मंझ समाइ ॥ 2 ॥
दादू जे नर प्राणी लै गता, सोई गत ह्वै जाइ ।
जे नर प्राणी लै रता, सो सहजैं रहै समाइ ॥ 3 ॥
सब तज गुण आकार के, निश्चल मन ल्यौ लाइ ।
आत्म चेतन प्रेम रस, दादू रहै समाइ ॥ 4 ॥

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