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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 148 में से

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पृष्ठ 99

102 चन्द्रशेखर आजाद
यशपाल अपने एक साथी को वहां पर बिठाकर शहर की ओर चले गए,
ताकि स्ट्रैचर या चारपाई का प्रबन्ध किया जा सके और यदि हो सके तो
किसी डाक्टर को भी लाया जाए, किन्तु उनके जाने के कुछ ही देर बाद
भगवतीचरण भी इस संसार से चल बसे।
देर रात गए जब यशपाल चारपाई, चादरें तथा दवा लेकर वहीं फिर
आए, तो भगवतीचरण की जगह केवल उनका शव पड़ा हुआ था। वह
अपने जिस साथी को वहाँ पर छोड़ गए थे, वह भी डरकर भाग गया था।
इससे यशपाल को बड़ी निराशा तथा भारी दुःख हुआ। शव को चादर में
लपेट दिया गया तथा उसे अकेले वहाँ छोड़कर साथियों से परामर्श लेने के
लिए यशपाल आवास पर लौट आए। यहाँ इस समाचार के ज्ञात होने पर
सभी शोक के सागर में डूब गए। प्रातःकाल आजाद, यशपाल तथा दो-
तीन दूसरे साथी वहाँ जाने को तैयार हो गए। भगवतीचरण की पत्नी दुर्गा
देवी भी जाना चाहती थीं, किन्तु साइकिल पर बैठाकर महिलाओं को ऐसे
स्थान पर ले जाना खतरे से खाली नहीं था। वह बेचारी अपने सुहाग के
लुट जाने पर इस मकान में रो भी नहीं सकती थीं। उनसे इस अवसर पर
चन्द्रशेखर आजाद ने कहा था—
"तुम हमारी माँ हो। हमारी बहिन हो। तुम्हारी इज्जत हमारे हाथ
में है और हमारी इज्जत तुम्हारे हाथ में है। मैं तुम्हारी भावनाओं को
समझ सकता हूँ, परन्तु तुमने और भगवती भाई ने तो अपनी भावनाएँ उसी
दिन पाँवों तले रौंद डाली थीं, जिस दिन आप दोनों इस पार्टी में शामिल
हुए। इसके यदि पहले इतनी कुर्बानी की है, तो कुछ और करो।'"
अतः दुर्गादेवी पति के अन्तिम दर्शन भी नहीं कर सकीं। आजाद और
यशपाल उस स्थान पर गए, जहाँ भगवतीचरण का शव पड़ा था और शव
को जमीन में दफना दिया गया, क्योंकि इसे श्मशान में ले जाना हर प्रकार
से कठिन था। एक तो जंगल में इस स्थान तक कोई वाहन नहीं आ सकता
था, दूसरे यदि इसे यों ही उठाकर ले जाते, तो पुलिस को पता लगने पर
सभी लोग भारी विपत्ति में पड़ सकते थे।
यह वर्णन श्री वीरेन्द्र की पुस्तक 'ये इंकलाबी दिन' के आधार पर है।
श्री मन्मथनाथ गुप्त ने भगवतीचरण की मृत्यु का वर्णन कुछ दूसरी तरह