अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा
पृष्ठ 100, कुल 148 में से
संदर्भ में पढ़ेंसे किया है। श्री गुप्त के अनुसार इस दुर्घटना में भगवतीचरण की अंतड़ियां
बाहर निकल आई थीं। उन्हीं के शब्दों में—
"भगवतीचरण की मृत्यु क्रान्तिकारी इतिहास की एक दर्दनाक घटना
है। इसके सम्बन्ध में कई तरह की बातें सुनी जाती हैं। जो कुछ मालूम हो
सका है, उसमें केवल इतना निर्विवाद है कि 28 मई, 1930 को साडे चार
बजे शाम को भगवतीचरण एक बम लेकर प्रयोग करने के लिए रावी के
किनारे पर गए। जहां बम एकाएक फट गया और भगवतीचरण बहुत सख्त
घायल हो गए। कहते हैं चोट से उनकी सारी अंतड़ियां बाहर निकल आई
थीं, किन्तु फिर भी अन्तिम समय तक उनको दल की धुन थी। यह तीन-
चार घण्टे तक जीवित रहे, किन्तु कुछ परिस्थितियां ऐसी आईं या पैदा की
गईं जिससे उनको डाक्टरी सहायता नहीं पहुँचाई जा सकी।"
निःसन्देह भगवतीचरण की मृत्यु क्रान्तिकारी दल तथा भगतसिंह की
मुक्ति की योजना के लिए एक भारी धक्का थी।
योजना की असफलता :