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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 97

100 चन्द्रशेखर आजाद
जाएँ और ड्राइवर उन्हें लेकर चल दे। पुलिस पर धावा बोलने के लिए
क्रान्तिकारियों के दो समूह बनाए गए थे। एक दल बमों से हमला करता,
जिसका नेतृत्व भगवतीचरण को करना था। दूसरा दल पुलिस को पीछा
करने से रिवाल्वरों से रोकता, इसके नेता चन्द्रशेखर आजाद बनाए
गए थे।
इस योजना के लिए भगतसिंह से भी सम्पर्क करके सलाह कर ली गई
थी। बोरस्टल जेल में पुलिस का सुरक्षा प्रबन्ध सेण्ट्रल जेल की तुलना में
कम था। अतः भगतसिंह का विचार था कि पुलिस पर हमला बोरस्टल
जेल के बाहर किया जाए, तो अच्छा रहेगा, किन्तु बोरस्टल जेल बड़ी सड़क
से कुछ दूर पीछे को थी, अतः भगतसिंह एवं बटुकेश्वरदत्त के मोटरगाड़ी
में बैठने तक यहाँ सेण्ट्रल जेल की पुलिस भी पहुँच सकती थी और उनका
दूसरी बार फिर सामना करना पड़ जाता। अन्ततः सेण्ट्रल जेल के बाहर
ही धावा बोलने की योजना निश्चित की गई। योजना रोमांचक थी। इसमें
दोनो ओर से कुछ लोगों का मृत्यु को प्राप्त हो जाना निश्चित था, किन्तु
क्रान्तिकारियों को मृत्यु का भय कभी रहा ही नहीं, वे ऐसा करने के लिए
जी-जान से जुट गए। भगतसिंह तथा दत्त को भी इसकी सूचना दे दी गई।
भगवतीचरण की मृत्यु :
इस योजना के लिए बम बनाए गए, अतः उनकी उपयोगिता देखने के
लिए भगवतीचरण ने उनका पूर्व परीक्षण करने का विचार किया। इस
परीक्षण के लिए 28 मई, 1930 के दिन वह सुखदेवराज तथा बच्चन, इन
दो क्रान्तिकारियों को साथ लेकर रावी के किनारे पहुँचे और रावी पार
कर जंगल में चले गए।
इधर अन्य क्रान्तिकारी बहावलपुर रोड वाले मकान में थे। योजना
को कार्यरूप देने में केवल दो दिन शेष रह गए थे, अतः यहाँ उपस्थित लोग
हथियारों की साफ-सफाई में लग गए। आजाद ने प्रत्येक को अलग-अलग
कार्य सौंपे थे, इसलिए सब अपना-अपना कार्य करने लगे। इसी बीच एक
तांगे में घायल सुखदेवराज आते दिखाई दिए। वह दर्द से कराह रहे थे, उनके
पैर में कपड़े की पट्टी बँधी थी, जो अत्यधिक रक्त बहने से लाल हो चुकी