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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद 81
स्वयं गिरफ्तार करवाया। इसके बाद न्याय का दीर्घ नाटक खेला गया,
जिसकी परिणति अन्ततः भगतसिंह, राजगुरु एवं बटुकेश्वरदत्त को फांसी
तथा अन्य कई क्रान्तिकारियों को विभिन्न प्रकार के कैद की सजाओं में
हुई, इसका वर्णन आगे यथास्थान किया जाएगा।
वायसराय की गाड़ी को उड़ाने की योजना.
असेम्बली बम काण्ड में भगतसिंह तथा बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी
के बाद उन पर साण्डर्स की हत्या का भी मामला चल चुका था और उनके
दल के कई सदस्य इस हत्याकाण्ड के सिलसिले में गिरफ्तार किये जा चुके
थे। अतः दल एक प्रकार से छिन्न-भिन्न-सा हो चुका था। फिर भी आजाद
इस दल के सेनापति थे; और एक योग्य, साहसी एवं कर्मठ सेनापति के
सभी गुण उनमें विद्यमान थे। इसके साथ ही भगवतीचरण वोहरा, उनकी
धर्मपत्नी दुर्गादेवी, सुशीला दीदी, श्री यशपाल आदि योग्य क्रान्तिकारी
उनके साथ थे। अतः दल का कार्य निरन्तर चलता रहा।
इसी कार्यक्रम के अन्तर्गत वायसराय की विशेष रेलगाड़ी को बम से
उड़ा देने की योजना बनाई गई। पहले इसके लिए 27 अक्तूबर, 1929 का
दिन नियत किया गया। परन्तु बाद में कुछ अनिवार्य कारणों से उस दिन
यह काम न हो सका। फिर इसके लिए 23 दिसम्बर, 1929 का दिन
निश्चित किया गया।