अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा
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पहले ही दूसरा बम फेंका गया। इससे लोगों के होश-हवास गुम हो गए।
सर जार्ज शूस्टर मेज के नीचे जा छिपा। इस हड़बड़ी में टकरा जाने से
उसे मामूली चोट भी आई। पूरा हाल नीले धुएँ से भर गया। दोनों ने
'इन्कलाब ज़िन्दाबाद' तथा 'साम्राज्यवाद का नाश हो' के नारे लगाए
तथा पर्चे फेंके, जिनमें लिखा था—
"बहरों को सुनाने के लिए ऊँची आवाज की जरूरत होती है। फ्रांस
के अराजकतावादी शहीद वेलां के ऐसे ही अवसर पर कहे गए इन अमर
शब्दों से क्या हम अपने काम का औचित्य सिद्ध कर सकते हैं।
शासन सुधार के नाम पर ब्रिटिश शासन द्वारा पिछले दस वर्षों से
हमारे देश का जो अपमान किया गया है, हम उस निन्दनीय कहानी को
दुहराना नहीं चाहते। भारतीय राष्ट्रीय नेताओं के साथ किये गए अपमानों
का भी उल्लेख नहीं करना चाहते जो इस असेम्बली द्वारा किये गए हैं, जिसे
पार्लियामेण्ट कहा जाता है।
हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि कुछ लोग साइमन कमीशन के
नाम पर जो जूठे टुकड़े मिलने की सम्भावना है, उनकी आशा लगाए हुए
हैं और मिलने वाली भावी हड्डियों के बँटवारे के लिए झगड़ा तक कर
रहे हैं। इसी समय सरकार भी भारतीय जनता पर दमनकारी कानून
लादती जा रही है, जैसे जनसुरक्षा बिल तथा औद्योगिक विवाद बिल।
इसी के साथ उसने प्रेस सिडीशन बिल को असेम्बली के अगले अधिवेशन
के लिए सुरक्षित रख लिया है। श्रमिक नेता जो खुले रूप में अपना कार्य
कर रहे थे, उनकी अन्धाधुन्ध गिरफ्तारियों से यह स्पष्ट हो जाता है कि
सरकार का क्या रुख है।
इन भयंकर उत्तेजक परिस्थितियों में 'हिन्दुस्तान समाजवादी
प्रजातान्त्रिक सेना' ने पूर्ण गम्भीरता के साथ अपना दायित्व अनुभव करते
हुए अपनी सेना को यह कार्य करने का आदेश दिया है, जिससे कानून का
यह अपमानजनक मजाक खत्म हो। विदेशी सरकार की शोषक नौकर-
शाही चाहे जो करे, किन्तु उसका नंगा रूप जनता के सामने लाना नितान्त
आवश्यक है।
जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्रों को लौट जायें