अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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माननी ही पड़ेगी। तुमने मेरा जो अपमान किया है, उसका उत्तर मैं दे
दूंगा। इसके बाद तुम कभी मुझसे बात न करना।"
भगतसिंह के साथ बम डालने में बटुकेश्वरदत्त को उनका साथी
बनाया गया।
आज़ाद का नाम इसके लिए किसी ने भी प्रस्तुत नहीं किया, क्योंकि
सभी सदस्यों के मत में दल के भविष्य के लिए उनका इस प्रकार के कार्यों
में भाग न लेना ही उचित था।
केन्द्रीय असेम्बली में दो बिल पेश किये गए थे—जन सुरक्षा बिल
तथा औद्योगिक विवाद बिल। प्रथम बिल का उद्देश्य राजनीतिक आन्दो-
लनों को कुचलना तथा दूसरे बिल का मज़दूरों को हड़ताल के अधिकार से
वंचित करना था। अतः ये बिल विवाद का विषय बन चुके थे। जनता को
विश्वास था कि यदि असेम्बली ने इन बिलों को अस्वीकार भी कर दिया
तो सरकार वाइसराय के विशेष अधिकार से इन्हें पास कर देगी।
8 अप्रैल, 1929 को असेम्बली में इन दोनों बिलों पर निर्णय सुनाया
जाना था। अतः भगतसिंह एवं बटुकेश्वरदत्त के लिए असेम्बली के एक
मनोनीत सदस्य की सिफारिश पर पास बनाये गए। दोनों ने खाकी क़मीज़
और नेकर पहनी थी। जयदेव कपूर उन्हें असेम्बली में उचित स्थान पर
बैठा आये, जहाँ से बम फेंकने में किसी प्रकार की असुविधा न हो और
किसी को चोट भी न लगे।