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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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64 चन्द्रशेखर आज़ाद
कर्ता प्रतिनिधि बनाया गया।
इस प्रकार चन्द्रशेखर आज़ाद को इस नये संगठन 'हिन्दुस्तान समाज-
वादी गणतन्त्र सेना' का अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ। यों देखा जाए
तो इस संगठन के उद्देश्यों तथा पूर्व संगठन 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसो-
सिएशन' के उद्देश्यों में कोई विशेष अन्तर नहीं था, किन्तु पूर्व दल के नाम
से उसके उद्देश्यों का परिचय नहीं मिलता था। इस सम्बन्ध में मन्मथनाथ
गुप्त लिखते हैं—
“काकोरी युग में समिति का नाम हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन
था। यह नाम कम अर्थव्यंजक समझा गया, यानी यह समझा गया कि इस
नाम से दल का उद्देश्य पूर्णरूप से व्यक्त नहीं होता। इसलिए इसको और
स्पष्ट करना चाहिए, तदनुसार दल का नाम 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन
सोशलिस्ट आर्मी' यानी हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना रखा
गया। संक्षेप में ऐसा इसलिए हुआ कि साधनों में विकास न होकर क्रान्ति-
कारी आन्दोलन के ध्येय में ही विकास होता रहा। उसी के अनुसार यह
नाम बदल दिया गया। यह परिवर्तन सूचित करता है कि दल के ध्येय में
और अधिक विकास हुआ। दल ने समाजवाद और मजदूर वर्ग के अधि-
नायकत्व को अपना ध्येय घोषित किया।
पुलिस से आँखमिचौनी :
काकोरी काण्ड के बाद फरार हो जाने पर आज़ाद लगभग दो वर्ष से
अपनी माँ से भी नहीं मिल पाए थे। उनके पिताजी का देहावसान हो चुका
था। वृद्धा माँ भी कानपुर में आकर रहने लगी थी। एकमात्र पुत्र
के वियोग में वह तड़प रही थी। उन्हें मालूम हो चुका था कि आज़ाद
किसी डकैती के बाद फरार हो गए थे। उनके अन्य कई साथी या तो
फाँसी की सजा पा चुके थे या उन्हें लम्बी-लम्बी कैद की सजाएं मिल चुकी
थी। पकड़े जाने पर आज़ाद के लिए भी सजा निश्चित थी। एक दिन
आज़ाद अपनी माँ से मिलने जा पहुँचे। इतने लम्बे समय बाद माँ-बेटे
मिले थे। अभी कुछ ही देर हुई थी कि भगतसिंह तथा सुखदेव भी वहाँ
पहुँच गए। भगतसिंह ने बताया कि उनके बारे में पुलिस को पता चल