अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रशेखर आजाद 63
3 सुखदेव (पंजाब)
4. शिव वर्मा (संयुक्त प्रान्त)
5 विजय कुमार (संयुक्त प्रान्त)
6 फणीन्द्रनाथ घोष (बिहार)
7 कुन्दन लाल (राजस्थान)
नये दल के गठन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि दल पर किसी एक
व्यक्ति का नियन्त्रण नहीं रहेगा। दल की सभी सम्पत्ति केन्द्रीय समिति के
अधिकार में रहेगी। जो भी कार्य किया जाएगा, उस पर पहले केन्द्रीय
समिति विचार करेगी। सभी निर्णय बहुमत के आधार पर किए जाएँगे।
इस नये दल के नाम में समाजवादी शब्द विशेष अभिप्राय से जोड़ा
गया। जो इस बात का सूचक था कि यह दल मार्क्सवाद के समाजवादी
सिद्धान्तों पर आधारित समाज की स्थापना करने के लिए प्रयत्नशील रहेगा
और शोषण को मिटाएगा।
इस बैठक में इन बातों पर भी विचार हुआ कि दल सशस्त्र क्रान्ति
द्वारा भारत की स्वतन्त्रता के लिए काम करेगा, जिसके लिए धन की
आवश्यकता अनिवार्य रूप से होगी। क्योंकि यह एक गुप्त आन्दोलन था,
अतः चन्दे से धन संचय करना सम्भव नहीं था। इस समस्या के निराकरण
के लिए डकैतियाँ डालना तय हुआ, साथ ही यह भी निश्चित हुआ कि
डकैतियाँ जहाँ तक हो सरकारी बैंकों, खजानों या डाकघरों में डाली
जाएँ। जनता में डकैतियाँ डालने से दल उसकी सहानुभूति से वंचित हो
सकता है। अतः केवल आपात काल के लिए व्यक्तिगत डकैतियाँ डाली जा सकती हैं।