अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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करने बंगाल गए, तो ये लोग उनका यहाँ रात में रहने का प्रबन्ध भी नहीं
कर पाए थे। अतः इनसे सहयोग की आशा छोड़ दी गई।
नये दल के गठन के लिए 8 सितम्बर, 1928 को फिरोजशाह कोटला
के किले के खण्डहरों में क्रान्तिकारियो की एक बैठक हुई (यह तिथि
विभिन्न पुस्तकों में अलग-अलग है, फिर भी अधिकतर पुस्तकों में यही
तिथि है।) इसमें बंगाल को छोड़कर उत्तरी भारत के सभी राज्यों के
प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भगतसिंह एवं सुखदेव पंजाब राज्य के प्रति-
निधि थे, कुन्दनलाल राजस्थान के, शिव वर्मा, ब्रह्मदत्त मिश्र, जयदेव,
विजयकुमार सिन्हा तथा सुरेन्द्र पाण्डे संयुक्त प्रान्त (उत्तर प्रदेश) के और
फणीन्द्रनाथ घोष एवं मनमोहन बनर्जी बिहार राज्य के प्रतिनिधि थे।
कुछ अज्ञात अपरिहार्य कारणों से चन्द्रशेखर आजाद इस बैठक में नहीं आ
सके, किन्तु भगतसिंह और शिव वर्मा से उन्होंने पहले ही कह दिया था कि
बैठक में बहुमत से जो भी निर्णय लिए जाएँगे, वे उन्हें मान्य होंगे।
अभी तक विभिन्न राज्यों के क्रान्तिकारी दलों के अपने अलग-अलग
नाम थे। अतः सभी प्रान्तों के दलों को मिलाकर एक अखिल भारतीय नया
दल बनाया गया। इस नये संगठन का नाम 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट
रिपब्लिकन आर्मी' अर्थात् 'हिन्दुस्तान समाजवादी गणतान्त्रिक सेना' रखा
गया। दल के सभी सदस्य नए थे। यों तो चन्द्रशेखर आजाद भी युवक ही
थे, किन्तु इससे पूर्व वह 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' मे राम-
प्रसाद बिस्मिल आदि के साथ कार्य कर चुके थे, जिससे उन्हें हथियारों
को चलाने आदि का अच्छा अनुभव था, जबकि अन्य नये लोग इस मामले
में अनुभवहीन थे, अतः 'हिन्दुस्तान समाजवादी गणतन्त्र सेना' का प्रधान
सेनापति-कमाण्डर इन चीफ उन्हीं को बनाया गया।
नये दल की केन्द्रीय समिति :
इस नये संगठन की एक केन्द्रीय समिति बनायी गई, जिसमें प्रत्येक
राज्य के प्रतिनिधि थे, जिनके नाम निम्नलिखित हैं।
1 भगतसिंह (पंजाब)
2 चन्द्रशेखर आजाद (संयुक्त प्रान्त