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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद 59
या था कि वह दल के कार्यों के लिए कुछ हथियार भी देंगे।
इस समय भगवानदास माहौर भी आज़ाद के साथ ही रहते थे। राजा
खलकश्री सिंहदेव के आजाद पक्के विश्वासपात्र बन गए थे। यहाँ रह-
कर वह ड्राइविंग तथा निशाना लगाने का अभ्यास भी करते रहते थे।
राजा साहब उनके साथ शिकार खेलने भी जाते रहते थे। राजा साहब की
उनके साथ इस घनिष्ठता से उनके कर्मचारी तथा रिश्तेदार ईर्ष्या करने
लगे, अतः आजाद ने खनियाधाना छोड़ दिया।
बम्बई में :
कुछ पुस्तको मे वर्णन मिलता है कि आजाद बुन्देलखण्ड के बाद फिर
बम्बई चले गए थे और वहाँ उन्होंने बन्दरगाह में कुली का काम किया।
दिनभर जहाजों में माल चढ़ाने या उतारने के काम करते थे, जिसके लिए
शाम को नौ आने मजदूरी मिलती थी। रात में बारह बजे तक विचर-
ते तथा फिर किसी गोदाम में या फुटपाथ पर सो जाते थे। यह क्रम
लगभग डेढ़ वर्ष तक चला।
यहाँ उन्होंने वीर सावरकर से भी भेंट की थी। सावरकर ने उन्हें
क्रान्तिपथ की कठिनाइयों से अवगत कराया और इनसे भयभीत न होने
का परामर्श दिया, इससे आजाद को एक नई प्रेरणा मिली और वह नये
सिरे से दल का संगठन करने के लिए बम्बई से उत्तर की ओर चल पड़े।