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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 63, कुल 148 में से

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पृष्ठ 63

58 चन्द्रशेखर आजाद

हुई थी। राजा साहब को शिकार के लिए जाते देख आजाद ने भी उनके
साथ चलने की इच्छा व्यक्त की। राजा को इससे बड़ा आश्चर्य हुआ कि
एक साधु शिकार करने की इच्छा व्यक्त कर रहा था। इस पर आजाद
ने अपने-आपको केवल एक पुजारी बताया था। अतः एक बन्दूक उन्हें भी
दे दी गई। इस पर राजा साहब तथा उनके कर्मचारियों को हंसी भी
आई। शिकार करते समय सभी लोग अपने-अपने स्थानों पर जम गए।
एक तगड़ा वनैला सूअर था। राजा तथा उसके सभी कर्मचारियों ने उस
पर गोलियां चलाईं, परन्तु सभी के निशाने चूक गए, फिर सबके अन्त में
आजाद ने निशाना लगाया, उनकी पहली ही गोली से सूअर धराशायी
हो गया। इस घटना के बाद राजा साहब को पक्का विश्वास हो गया कि
वह साधु या पुजारी न होकर कोई क्रान्तिकारी है। राजा साहब स्वयं भी
स्वतन्त्रता सेनानियों से सहानुभूति रखते थे। यह परिचय मित्रता में बदल
गया। काफी दिनों बाद आजाद ने उन्हें अपनी वास्तविकता बतायी।
एक बार बड़े लाट साहब ओरछा आने वाले थे। आजाद ने राजा के
पास सूचना भिजवाई कि इस अवसर पर वह लाट साहब का स्वागत
अपने ढंग से करना चाहते थे। राजा साहब ने आजाद से निवेदन किया
था कि लाट साहब राज्य के अतिथि बनकर आ रहे थे, अतः वह (आजाद)
ऐसा कुछ न करें।
यह भी कहा जाता है कि बाद में यही राजा साहब अपने एक मुंहलगे
नौकर के बहकावे में आकर आजाद को पकड़वाने के लिए सहमत हो गए
थे। जब उनके तथा इस नौकर के बीच इस योजना पर बात हो रही थी,
आजाद उस समय वहीं पर सो रहे थे। राजा को कोई शक न हो, इसलिए
वह जोर-जोर से खर्राटे ले रहे थे। इसके तुरन्त बाद मौका मिलते ही वह
वहां से भाग गए।
मास्टर रुद्रनारायण ने ही आजाद को साधुवेश में रहने का परामर्श
दिया था। उन्हीं के सहयोग से आजाद का सम्पर्क राजा साहब रानिया-
धाना से भी हुआ था। आजाद पहले उनके यहां एक अच्छे मोटर-मैकेनिक
के रूप में गए थे। बाद में राजा साहब को उन्होंने बताया था कि वह एक
क्रान्तिकारी हैं। मार्च, 1928 में राजा साहब ने उन्हें यह आश्वासन भी