अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचालाकियों के विषय में उनकी कहानियाँ सुनते रहे। जब पुलिस वाले चले
जाते, तो आजाद हँसकर हमसे कहते—ये साले मुझे हौवा और जादूगर
बताये हुए हैं, ये बड़े मामूली लोग हैं। ये एक मजिस्ट्रेट के सामने गुलाम की
तरह खड़े रहते हैं। अब उस कुमुदसिंह को लो, जो यह कह रहा था—
क्रान्तिकारी लोग बड़े परिवारों में से होते हैं। अब अशफ़ाक़उल्ला को लो,
तो उसे डिप्टी मजिस्ट्रेट समझा जा सकता है।"
झाँसी में रहकर मोटर कम्पनी के कार्य के अतिरिक्त वह जंगलों में
जाकर निशाना लगाने का अभ्यास करते रहते थे। इन दिनों भगवानदास
माहौर से निरन्तर उनका सम्पर्क बना रहा।
साधु वेश में :
इसके बाद आजाद धीमरपुर गाँव चले गए और गाँव के बाहर एक
कुटिया बनाकर साधुवेश में रहने लगे। उन्हें ऐसा करने का परामर्श
रुद्रनारायण ने ही दिया था। यहाँ वह लोगों को रामचरित मानस की
चौपाइयाँ सुनाते थे। आरम्भ में लोग उन्हें भोजन का सामान कुटिया में
ही दे जाते थे, किन्तु बाद में आजाद श्रद्धालु लोगों के घर ही जाकर भोजन
करने लगे थे। यहीं उन्होंने छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए एक पाठशाला
भी खोली। पहले विद्यालय खुले आसमान के नीचे लगता था, परन्तु बाद
में गाँव के ही एक धनवान व्यक्ति ठाकुर मलखानसिंह ने इस कार्य के
लिए अपने घर की बैठक दे दी थी। बाद में आजाद, जो उन दिनों ब्रह्म-
चारी के नाम से जाने जाते थे, ठाकुर मलखानसिंह के ही घर में रहने लगे,
क्योंकि मलखानसिंह तथा उनके तीन भाई नौकरी करते थे और घर से
बाहर ही रहते थे। पुरुष सदस्य के घर में रहने से घर की सुरक्षा हो जाती
थी। आजाद वस्तुतः घर के सदस्य जैसे ही बन गए।
नरेशों के सम्पर्क में :
इस अवधि में उनका कई राजाओं एवं जमींदारों से भी सम्पर्क हुआ
था। एक बार ओरछा के राजा अपने दीवान आदि के साथ जंगल में
शिकार खेलने के लिए जा रहे थे, तब उनकी साधुवेशधारी आजाद से भेंट