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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 61

56 चन्द्रशेखर आजाद
झाँसी में :
फरारी की अवस्था में सर्वप्रथम वह झाँसी पहुँचे। यहाँ उन्होंने मोटर
ड्राइविंग तथा मैकेनिक का काम सीखा और बुन्देलखण्ड मोटर कम्पनी में
काम किया। यहाँ काम करते समय एक बार उनके साथ एक दुर्घटना भी
हो गई, एक कार चालू नहीं हो रही थी, कोई भी व्यक्ति उसका हैण्डिल
नहीं घुमा पा रहा था। आजाद ने इसे चालू करने के लिए इतनी जोर से
हैण्डिल घुमाया कि उनके हाथ की हड्डी उखड़ गई। उन्हें तुरन्त अस्पताल
ले जाया गया। इसका ऑपरेशन करने के लिए क्लोरोफार्म सुंघाकर बेहोश
करना आवश्यक था, किन्तु डाक्टरों की इस राय से आजाद घबरा गए,
क्योंकि उन्होंने सुन रखा था कि बेहोशी की हालत में कभी-कभी व्यक्ति
अपनी गोपनीय बातें भी बता देता है। अतः आजाद बिना बेहोश हुए ही
ऑपरेशन कराने को तैयार हो गए, किन्तु डाक्टरों ने उनकी यह बात नहीं
मानी। आजाद ऑपरेशन-टेबल से उतर पड़े। तब उनके मित्रों ने किसी
तरह बेहोश किए जाने के लिए राजी किया।
सम्भवतः बेहोशी की हालत में उनके मुँह से कोई ऐसी बात निकल
गई, जिससे उनके क्रान्तिकारी होने का पता डाक्टर को लग गया था।
ऑपरेशन के बाद डाक्टर उनके साथ बड़े सम्मान से बातें कर रहा था।
अस्पताल से छुट्टी देते समय डाक्टर ने उनसे कहा--"अब आपका हाथ
ठीक हो गया, है। कोई चिन्ता न करिए। मुझे आशा है, आप अपने हाथों
का इस्तेमाल देश के लिए वीरता के साथ करेंगे।"
झाँसी में आजाद मास्टर रुद्रनारायण के छोटे भाई बनकर रहे थे।
डा० माहौर के अनुसार पुलिस ने कई बार रुद्रनारायण के घर पर छापे
भी मारे थे, आजाद को सामने देखकर भी वे उन्हें गिरफ्तार नहीं कर पाये,
क्योंकि उनके साथ आजाद का व्यवहार इस प्रकार का होता था कि पुलिस
कल्पना ही नहीं कर सकती थी कि वही आजाद होंगे और पुलिस के पास
उनका कोई फोटोग्राफ था नहीं, जो उन्हें पहचान पाती--.
"बार-बार रुद्रनारायण के घर की तलाशी हुई, पर बिल्कुल खुले रूप
में रहने वाले आजाद गिरफ्तार नहीं किए जा सके। आजाद आये हुए पुलिस
वालों और उनके अफसरों से मजाक करते रहे और बदमाश आजाद की