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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 60

चतुर्थ अध्याय
मध्यान्तर काल
काकोरी काण्ड के बाद चन्द्रशेखर आजाद ही ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें
लाख प्रयत्न करने पर भी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी। काकोरी काण्ड
के फैसले तक दल के लोगों को भी मालूम नहीं था कि आजाद कहाँ हैं।
श्री मन्मथनाथ गुप्त के अनुसार इस काण्ड के बाद वह दल के लोगों से
अपने घर जाने के लिए कहकर गए थे, किन्तु दल के लोगों को ही मालूम
नहीं था कि उनका घर उन्नाव था अथवा भाभरा।
इस काण्ड में उनके सभी साथी गिरफ्तार हो चुके थे। किन्तु आजाद
को खोजने के लिए पुलिस ने कुएँ, तालाब आदि भी छान मारे। इस विषय
में डॉ० भगवानदास माहौर ने लिखा है—
“प्रबल पराक्रम अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने की चेष्टा में
कोई कसर उठा न रखी। आजाद पर कई हजार रुपये का इनाम घोषित
हो चुका था। जैसा कि कहते हैं; सारे कुओं में खोज हो चुकी थी, नदियों
में गोता लगाया गया और खोहों में तलाशा गया। पर आजाद रुद्रनारायण
के साथ परम शान्ति में निवास कर रहे थे।”
इस समय उनका निवास स्थान झाँसी और उसके आस-पास का क्षेत्र
ही था। उन दिनों झाँसी स्थित दल का केन्द्र ही उनके छिपने की जगह थी।
ऐसी स्थिति में कुछ दिनों तक शान्त बने रहना आवश्यक था। काकोरी
काण्ड के बाद से भगतसिंह के साथ नये दल के संगठन तक का समय
आजाद के क्रान्तिकारी जीवन का मध्यान्तर काल कहा जा सकता है। इस
काल में उनकी निम्नलिखित गतिविधियाँ रहीं।