अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ें52 चन्द्रशेखर आजाद
' गोपीमोहन भी गिरफ्तार किये गए थे, किन्तु इनमें से प्रथम दो व्यक्ति
मुखबिर बन गए तथा गोपीमोहन साहा ने सरकारी गवाह बनना स्वीकार
कर लिया। इस डकैती में भाग लेनेवाला बनवारीलाल भी इकबाली गवाह
बन गया। इन लोगों ने पुलिस को सब-कुछ बता दिया, केवल बनारस केन्द्र
का कोई भी मुखबिर न मिल सका, अतः इस केन्द्र के बारे में पुलिस कुछ भी
पता न लगा सकी।
इन चारों को छोड़कर शेष चौबीस व्यक्ति अभियुक्त सिद्ध किये गये।
इक्कीस गिरफ्तार कर लिये गए तथा अशफाकउल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद
और शचीन्द्र बख्शी पुलिस के हाथ नहीं आए। इन्हें फरार घोषित कर दिया
गया।
बाद में दामोदरस्वरूप सेठ गम्भीर रूप से अस्वस्थ होने के कारण छोड़
दिये गए। मथुरा-आगरा केन्द्र के शिवचरणलाल तथा उरई-कानपुर केन्द्र के
वीरभद्र तिवारी पर से रहस्यमय अज्ञात कारणों से मुकदमा उठा लिया
गया।
मुकदमा :
शेष गिरफ्तार अभियुक्तों पर निम्नलिखित अभियोगों पर मुकदमा
चला—
- धारा 121 ब्रिटेन के सम्राट् के विरुद्ध युद्ध की घोषणा।
- धारा 120 अराजनीतिक षड्यन्त्र।
- धारा 396 कत्ल एव डकैती।
- धारा 302 कत्ल।