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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 56

चन्द्रशेखर आज़ाद
कर दिया। हम लोगों ने बहुत शीघ्र शायद दस मिनट से भी कम समय में
यह सब काम समाप्त कर दिया और थैलों को लेकर झाड़ियों की ओर
चले गए।"
इस लूट के बाद क्रान्तिकारी लखनऊ की ओर चले गए। रास्ते में रुपये
निकालकर चमड़े के थैलों को बरसात के पानी में डाल दिया गया और
फिर सभी लखनऊ पहुँच गए। इस डकैती में युवकों के इस दल को किसी
प्रकार के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा। जबकि गाड़ी में चौदह
व्यक्ति ऐसे थे, जिनके पास हथियार भी थे। दो सशस्त्र गोरे सैनिक भी
थे। गाड़ी का ड्राइवर तथा इन्जीनियर बहुत अधिक भयभीत हो गए थे।
ड्राइवर इञ्जिन में लेट गया था और इन्जीनियर डरकर शौचालय में जा
छिपा था। यात्रियों से पहले ही कह दिया गया था कि वे निश्चिन्त रहें,
उन्हें कोई कुछ नहीं कहेगा; केवल सरकारी खजाना लूटा जाएगा। अतः
वे शान्ति से बैठे रहे। गाड़ी में बैठे लोगों ने यह समझ लिया था कि गाड़ी
को बहुत अधिक लोगों ने घेर लिया है, जबकि यह काम केवल दस युवकों
का था, जिनमें से अधिकतर सदस्यों की अवस्था बाईस वर्ष के आसपास थी।
हाँ, इन सभी युवकों का शरीर स्वस्थ तथा सुदृढ़ अवश्य था।
इस डकैती की सफलता से एक ओर जहाँ दल को कर्जों से मुक्ति
मिली, वहीं दूसरी ओर युवकों का साहस भी बढ़ गया। साथ ही नये हथि-
यार भी खरीदे गए और आगे की योजना भी बनने लगी।
गिरफ्तारियों का सिलसिला :
काकोरी काण्ड सरकार के लिए खुली चेतावनी के समान था। शीघ्र
ही पुलिस सक्रिय हो गई। जगह-जगह छापे मारे जाने लगे, तलाशियाँ ली
जाने लगीं। गुप्तचर विभाग भी अपने स्तर से इसकी खोज में जुट गया।
शीघ्र ही चालीस व्यक्ति गिरफ्तार कर लिये गए, जबकि डकैती में केवल
दस ही लोगों ने भाग लिया था। ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया
गया, जिनका इस मामले में कभी कोई सम्बन्ध नहीं था। इस प्रकार के
लोगों को बाद में छोड़ दिया गया।
शाहजहाँपुर के बनारसीलाल तथा इन्दुभूषण मित्र तथा कानपुर के