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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद 45
जा सकता है। काकोरी काण्ड तक वह 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन'
के सदस्य रहे। वहाँ उन्होंने शचीन्द्रनाथ सान्याल के नेतृत्व में काम किया,
व रामप्रसाद बिस्मिल आदि क्रान्तिकारी उनके साथी थे। इसे उनके
क्रान्तिकारी जीवन का पूर्वार्द्ध कहा जा सकता है। इस काण्ड के बाद
उन्होंने भगतसिंह आदि के साथ मिलकर क्रान्तिकारी गतिविधियों का
संचालन किया। यह उनके इस जीवन का उत्तरार्द्ध कहा जाएगा।
गवर्नर का सेक्रेटरी बनकर ठगी
उनके इस उत्तरार्द्ध जीवन में भी इस प्रकार की डकैती की योजनाएँ
बनी थीं, किन्तु भगतसिंह जनता पर डाके डालने के पक्ष में नहीं थे। अतः
डाके तो नहीं डाले गये, किन्तु सामान्यतया अन्य तरीकों से धन संग्रह
अवश्य किया गया। जब वह स्वयं अपने दल के अध्यक्ष थे। एक बार उन्होंने
कानपुर के एक सेठ से गर्वनर का सेक्रेटरी बनकर पन्द्रह हजार रुपये ऐंठ
लिये थे।
घटना इस प्रकार है—रात के लगभग नौ बजे थे। सेठ दिलसुख राय
अपने मुनीम के साथ बैठे हुए बही-खातों की जाँच कर रहे थे। तभी सेठजी के
नौकर ने जाकर उन्हें बताया कि कोई साहब उनसे मिलना चाहते हैं। सेठ-
जी ने मुनीम को उन लोगों के साथ बातें करने के लिए भेजा। मुनीम जी उन
लोगों से बातें करने गये और लौटकर बताया कि गवर्नर साहब के सेक्रेटरी
आये थे। उनके साथ उनका एक बाबू और एक चपरासी भी था। वे लोग
उसी समय सेठजी से मिलना चाहते थे। इतना सुनकर सेठजी स्वयं उनसे
मिलने के लिए चल पड़े और आदर सहित उन्हें अन्दर लिवा लाये। उन्हें
बड़े सम्मान के साथ बैठाया गया। हाथ जोड़ते हुए सेठजी ने सेक्रेटरी साहब
से आने का कारण पूछा। इस पर सेक्रेटरी साहब ने बताया, "लड़ाई में
सरकार के पास धन की कमी हो गई है, इसलिए बड़े-बड़े धनवान लोगों से
सरकार चन्दा माँग रही है। मैं इसीलिए गवर्नर साहब की ओर से आपके
पास चन्दा माँगने आया हूँ।"—
"आपको कष्ट करने की क्या आवश्यकता थी, मुझे बता दिया होता;
मैं स्वयं आपकी सेवा में हाजिर हो जाता" सेठजी बोले।