अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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इस पर उस व्यक्ति ने अपनी विवशता उनके सामने रखी और बताया
कि इस समय उनके पास भी पैसे नहीं थे, अन्यथा वह स्वयं लौटा देता तथा
पैसा लौटाना भी नितान्त आवश्यक था। मित्र की विवशता देखकर आजाद
ने उसे वचन दे दिया कि पैसे शीघ्र ही उसके घर पहुंचा दिये जाएंगे।
मित्र को दिये गए वचन का पालन करना जरूरी था, परन्तु रुपए
कहाँ से लौटाए जाएँ। इसी उधेड़बुन मे कुछ समय तक सोचते रहने के
बाद आजाद एक निर्णय पर पहुँचे; उन्होने मन-ही-मन कार्यक्रम की रूप-
रेखा बना ली।
तब आजाद दिल्ली मे थे। भरी दोपहर मे वह अपनी योजना को
कार्यरूप मे परिणत करने के लिए निकल पड़े और चांदनी चौक पहुंच
गये। दिल्ली के सबसे व्यस्त एवं भीड़भाड़ वाले स्थानो मे चांदनी चौक
भी एक है। उनके साथ उनके पांच-छः साथी और भी थे। सुन्दर नये कपड़ो
मे सजे-धजे आजाद एक जौहरी की दुकान के सामने जा पहुँचे। उन्होंने
साथियों को बाहर ही खडे रहने को कहा तथा अपने आप दुकान के अन्दर
घुस गये। अन्दर जाकर वह जोहरी के साथ आभूषणों के मूल्य तथा अन्य
विषयों में बातें करने लगे। तभी उन्होंने अपने साथियो को सचेत किया।
संकेत पाते ही बाहर खड़े साथी भी दुकान के अन्दर घुसे गए। आसपास
के लोगो को कुछ पता भी न लग सका और आजाद अपने मित्रो के साथ
जोहरी की दुकान से पन्द्रह हजार रुपये लूटकर भाग खड़े हुए।
चार हजार रुपये उस मित्र को समय पर लौटा दिये। इसके बाद