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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद 37
आजाद गम्भीर हो गये, किन्तु विपत्ति से घबराना उन्हींने सीखा ही नहीं
था। उन्होंने पैसों का प्रबन्ध करने का उत्तरदायित्व अपने ऊपर ले लिया
और अध्यक्ष से निश्चिन्त रहने को कह दिया। उनका एक मित्र था, जो
रुपयों के लेन-देन का कार्य करता था। वह आजाद का बड़ा सम्मान करता
था। आजाद उसी के पास पहुंचे। उन्होंने मित्र के सामने अपनी समस्या
रखी। और बताया कि उन्हें तत्काल चार हजार रुपयों की आवश्यकता
थी, किन्तु उस समय उस मित्र के पास भी रुपये नहीं थे। उसने दूसरे दिन
रुपयों का प्रबन्ध कर देने की बात कही, परन्तु चन्द्रशेखर आजाद अपने
दल के अध्यक्ष को उसी दिन पैसे देने का वचन दे चुके थे। अतः उन्होंने
मित्र से कहा कि उन्हें तत्काल रुपयों की आवश्यकता थी। वह कहीं से भी
प्रबन्ध कर दे और वायदा किया कि रुपया छः महीने बाद ब्याज सहित
लौटा दिया जायेगा। मित्र भी बड़ी दुविधा में पड़ गया। इसके बाद उनके
उस मित्र ने किसी दूसरे व्यक्ति से चार हजार रुपये कर्ज लेकर उन्हें दे
दिये।
इस प्रकार चन्द्रशेखर आजाद दल की आवश्यकता के लिए किसी
प्रकार कर्ज लेकर भी रुपयों का प्रबन्ध कर देते थे। चन्द्रशेखर आजाद तथा
उनके सभी साथी बड़ी ही निर्धनता की स्थिति में जीवन का निर्वाह करते,
किन्तु दल के पैसों का हिसाब बड़ी सावधानी और ईमानदारी से रखा
जाता। एक पैसे का भी अपव्यय नहीं किया जाता।
दुकान में मुनीमगीरी :