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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 41, कुल 148 में से

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पृष्ठ 41

चन्द्रशेखर आजाद

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आजाद ने अपने मित्रों से कई बार ऋण भी लिया था। यहाँ उनके जीवन
की इसी प्रकार की कुछ घटनाओं का वर्णन किया जा रहा है, जिनसे दल
के प्रति उनके निःस्वार्थ प्रेम का परिचय प्राप्त होता है। कहा जाता है एक
बार दल के सामने धन की परम आवश्यकता थी; क्योंकि पिस्तोलें खरी-
दनी थी। क्या किया जाए? आजाद इसी चिन्ता मे डूबे हुए थे। दोपहर
के समय एक व्यक्ति उनके पास आया। उसने बताया कि उनके (आजाद
के) माता-पिता घर में भूखो मर रहे हैं। उनके लिए वह व्यक्ति इधर-उधर
से माँगकर किसी तरह कुछ रुपये लाया था। उसने ये रुपये चन्द्रशेखर
आजाद को दे दिये, ताकि वह इन्हें अपने माता-पिता के पास भिजवा दें।
रुपये मिलने पर आजाद ने उस व्यक्ति का आभार प्रकट किया और
इसे ईश्वर की सहायता मानते हुए उस व्यक्ति से कुछ इस तरह की बात
की—
"इन रुपयों के लिए मैं तुम्हारा आभार प्रकट करता हूँ। इस समय
दल को इनकी बहुत बड़ी आवश्यकता थी। ईश्वर की कृपा से तुम सही
समय पर आ गये।"
आजाद की इन बातों को सुनकर, वह व्यक्ति बड़ा हैरान हुआ और
बोला, "पण्डितजी! मैंने यह पैसा आपके माता-पिता की सहायता के लिए
दिया है। वे भूखों मर रहे हैं, पर समझ में नहीं आता, आप इस पैसे को
दल के लिए खर्च करना चाहते हैं।"
इस पर आजाद बोले, "भैया, देश के करोड़ों लोग भूखों मर रहे हैं,
मुझे केवल अपने ही माता-पिता की नहीं, अपितु पूरे देश की चिन्ता है।
इसके लिए इस समय पिस्तोल खरीदना नितान्त आवश्यक है। देश की
ऐसी स्थिति में केवल अपने परिवार की चिन्ता करना स्वार्थ मात्र है।"
उनके इस उत्तर ने उस व्यक्ति को निरुत्तर कर दिया और वह लौट
गया।
इसी प्रकार एक बार फिर दल को रुपयों की अत्यन्त आवश्यकता थी।
दल के अध्यक्ष ने यह समस्या आजाद के समक्ष रखी और उन्हें बताया कि
दल को तुरन्त चार हजार रुपयों की आवश्यकता थी। यदि यह पैसा न
... का काम रुक जाएगा। समस्या के महत्व पर विचार करके