अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ें32 चन्द्रशेखर आजाद
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, श्री शचीन्द्रनाथ बख्शी तथा श्री रवीन्द्रमोहन बाग
इस दल के कार्यों को आगे बढ़ा रहे थे।
इन दिनों चन्द्रशेखर आजाद भी बनारस में प्रसिद्ध हो चुके थे, अतः
क्रान्तिकारी दल का एक सदस्य प्रणवेश उनसे मिला। आजाद से मिलकर
प्रणवेश अत्यधिक प्रभावित हुआ। इस प्रकार आजाद भी 'हिन्दुस्तान
रिपब्लिकन एसोसिएशन' के सदस्य बन गये। यहीं उनकी भेंट रामप्रसाद
बिस्मिल आदि महान् क्रान्तिकारियों से हुई और यहीं से उनके भावी
क्रान्तिकारी जीवन का एक नया अध्याय प्रारम्भ हुआ।
दल के संगठन में :
आजाद हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य बन गये, तभी
दल की सदस्यता का विस्तार किया जाना निश्चित हुआ। आजाद ने इस
कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया। वह ब्राह्मण के वेश में इधर-उधर घूमते
रहते तथा युवकों से मिलते और उनके विचार जानते। क्रान्तिकारी विचारों
वाले युवकों को खोजकर अपने दल का सदस्य बनाते। इस प्रकार थोड़े ही
समय में उनके प्रयत्नों से दल के सदस्यों की संख्या बढ़ने लगी, किन्तु दल
के पास धन का अभाव था। यद्यपि दल की जनशक्ति में भारी वृद्धि हो गई
थी, परन्तु दल के पास साधनों की कमी थी। इस कमी को दूर करने के
लिए दल के सदस्यों की बैठकें हुईं।