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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद 31
गतिविधियों से अछूता नहीं रहा था। इन गतिविधियों में बंगाल के क्रान्ति-
कारियों की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही थी। कुछ समय के लिए क्रान्तिकारी
आन्दोलन समाप्त जैसा हो गया था। बनारस षड्यन्त्र के नेता शचीन्द्र-
नाथ सान्याल को इस षड्यन्त्र में आजन्म कालेपानी की सजा तथा अन्य
लोगों को भी अनेक प्रकार की सजाएं हुई थीं। सन् 1920 में सभी राज-
नीतिक बन्दियों को आम माफी दे दी गई थी, फलतः ये सभी क्रान्तिकारी
छूट गये। इधर असहयोग आन्दोलन के इस प्रकार बीच में ही समाप्त
हो जाने पर युवक खिन्न थे। शचीन्द्रनाथ सान्याल ने इस अवसर का लाभ
उठाया तथा पुनः क्रान्तिकारी दल का गठन किया। सान्याल का मुख्य
क्षेत्र उत्तर प्रदेश ही था। उन्होंने शीघ्र ही क्रान्तिकारी दल को सुदृढ़ बना
दिया। इन्हीं दिनों बंगाल में अनुशीलन समिति नाम की क्रान्तिकारियों
की संस्था भी कार्य कर रही थी। अनुशीलन समिति ने बनारस में कल्याण
आश्रम नाम के एक आश्रम की स्थापना भी की थी, यह आश्रम वास्तव में
समिति के सदस्य क्रान्तिकारियों का कार्यालय ही था।
क्रान्तिकारी दल तथा अनुशीलन समिति लम्बे समय तक अलग-अलग
कार्य करते रहे। दोनों के उद्देश्य तथा कार्यप्रणालियां समान थीं, अतः
बाद में ये दोनों मिलकर एक दल के रूप में कार्य करने लगे। इस संयुक्त
दल का नाम 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' रखा गया। इस एसो-
सिएशन के निम्नलिखित मुख्य उद्देश्य थे—

  1. संगठित क्रान्ति द्वारा गणतन्त्र स्थापित करना, जिसमें प्रान्तों को
    आन्तरिक मामलों में पूर्ण स्वतन्त्रता होगी।
  2. प्रत्येक सही सलामत मस्तिष्क वाले वयस्क नागरिक को मता-
    धिकार।
  3. शोषण रहित समाज की स्थापना।
    स्पष्ट है कि ये सभी उद्देश्य साम्यवादी रूस की शासन प्रणाली से
    प्रभावित थे। कुछ ही वर्ष पूर्व सन् 1917 में अक्तूबर क्रान्ति के बाद
    सोवियत संघ में साम्यवाद की स्थापना हो चुकी थी। 'हिन्दुस्तान रिपब्लि-
    कन एसोसिएशन' के सदस्य पूरे उत्तर प्रदेश में फैले हुए थे। शाहजहांपुर
    में पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल, कानपुर में सुरेश बाबू तथा बनारस में श्री