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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 35, कुल 148 में से

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पृष्ठ 35

30 चन्द्रशेखर आजाद
में भी मन्मथनाथ गुप्त लिखते हैं—
"....महात्मा गांधी ने इस पर आम लोगों में अहिंसा के भाव की कमी
देखकर आन्दोलन को स्थगित कर दिया। 13 मार्च को गांधीजी भी
गिरफ्तार कर लिये गए। एक आश्चर्य की बात यह है कि जब तक
आन्दोलन जोरों से चलता रहा और गांधी जी खुल्लमखुल्ला तौर पर
उसका नेतृत्व कर रहे थे, उस समय तक उनको किसी ने नहीं पकड़ा, किन्तु
ज्यों ही आन्दोलन को बन्द कर दिया गया, त्यों ही सरकार ने उनको
पकड़ लिया। यह कोई आकस्मिक घटना नहीं थी, क्योंकि गांधीजी जिस
समय आन्दोलन चला रहे थे, उस समय वह पैंतीस करोड़ थे, किन्तु जिस
समय उन्होंने आन्दोलन स्थगित कर दिया और लोगों की बढ़ती हुई
उमंगों पर पानी फेर दिया, उनको एक खामख्याली के नाम पर निरुत्साह
कर दिया, उस समय वे एक व्यक्ति हो गये।"
श्री गुप्त के इन शब्दों में कुछ अत्युक्ति हो सकती है, किन्तु इतना
निश्चित है कि एक मामूली-सी घटना के कारण आन्दोलन को इस प्रकार
बीच में ही रोक देने से भारतीयों को विशेषकर युवा वर्ग को इससे बड़ी
निराशा हुई। गुप्तजी स्वयं एक क्रान्तिकारी रहे हैं, अतः उनके इन शब्दों
से तत्कालीन क्रान्तिकारियों के मनोभावों का सुन्दर परिचय मिलता है।
आन्दोलन के इस प्रकार बीच में ही रुक जाने पर चन्द्रशेखर आजाद को
बड़ी निराशा हुई, किन्तु उनकी यह निराशा स्थायी न होकर एक क्षणिक
आवेग मात्र थी। वह जिस मार्ग पर बढ़ चुके थे, उससे पीछे लौटने का
उनके लिए प्रश्न ही नहीं उठता था।