अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ें22 चन्द्रशेखर अ...
बैंत लगवाये गए। , राह चलने वालो से कुलियों का काम लिया गया
हुक्म भी था कि स्कूल के लड़के दिन मे आकर तीन बार ब्रिटिश झ
मलामी करें, बच्चों से प्रतिज्ञा कराई गई कि वे कभी कोई अपरा
करेंगे तथा उनसे पश्चाताप करवाया गया। लाला हरिकिशन स
चालीस लाख रुपये जब्त कर लिये गए तथा उन्हें काले पानी की सज
इन अत्याचारों का कहाँ तक वर्णन किया जाए।"
पंजाब की इन घटनाओं से पूरे भारतवर्ष में एक क्षोभ का वाता
उत्पन्न हो गया। चन्द्रशेखर इन सब घटनाओं से अपरिचित नहीं र
समस्त घटनाओं के विषय में उन्होंने समाचार-पत्रों में पढ़ा। देशवा
पर विदेशी अंग्रेजों के इन अत्याचारों से किशोर चन्द्रशेखर का खून
लगा। उनके हृदय में प्रतिशोध की आग धधकने लगी। इस समय
अवस्था लगभग चौदह वर्ष थी।
बैंतों की सजा और चन्द्रशेखर से आजाद :
अमृतसर के बाद दूसरे वर्ष 1920 में कांग्रेस का अधिवेशन कल
में हुआ। यह एक विशेष अधिवेशन था, जिसमे लाला लाजपतराय स
पति बनाये गए। इस अधिवेशन में सरकार के साथ असहयोग का प्र
रखा गया। यद्यपि देशबन्धु चित्तरंजनदास, महामना मदनमोहन मालवी
विपिनचन्द्र पाल आदि पुराने नेता इस प्रस्ताव के विरुद्ध थे, फिर भी
प्रस्ताव पास हो गया। फिर इसी वर्ष कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन नाग
में हुआ, जिसके सभापति विजय राघवाचार्य थे। इस अधिवेशन में भी
प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया।
1921 के प्रारम्भ में ही महात्मा गांधी के नेतृत्व में पूरे देश में अस
योग आन्दोलन चलाया गया। असहयोग आन्दोलन की यह आँधी अपने
वेग के साथ देश-भर में फैल गई। विदेशी वस्त्रों की होलियां जलाई गई
वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार कर दिया। विद्यार्थी सरकारी त
सरकार से सहायता लेनेवाले विद्यालयों का बहिष्कार करने लगे। विदे
वस्तुओं की दुकानों पर आन्दोलन करनेवाले धरना देते थे। जगह-जग
सभाएं हुईं। जुलूस निकाले गए। ... ... के साथ हर प्रका