अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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सी प्रकार बदअमनी फैले। इस सम्बन्ध में सरकार पनपने से पहले नोच
लेने वाली नीति बरतना चाहती थी। जनरल डायर तब तक गोली
चलाते रहे, जब तक कि उनका सारा क्रोध ठण्डा न हो गया। और इस
बात को उन्होंने बड़ी अकड़ के साथ कमीशन के सामने कहा। क्यों न कहते,
उन्हें किसी प्रकार का डर तो था नहीं।"
इस काण्ड में कुल सोलह सौ गोलियाँ चली थीं। सरकार की रिपोर्ट
के अनुसार इसमें चार सौ व्यक्तियों की मृत्यु हुई तथा लगभग दो हजार
व्यक्ति घायल हुए। इस प्रकार की घटनाओं में सरकार की रिपोर्ट प्रायः
गलत ही होती है, अतः यह रिपोर्ट भी सही नहीं थी। बाद में इसकी जाँच
के लिए कांग्रेस ने एक आयोग का गठन किया, जिसकी रिपोर्ट के अनुसार
मृतकों एवं घायलों की संख्या सरकारी रिपोर्ट से लगभग दुगुनी थी।
इस काण्ड के बाद भी सरकार की क्रूरता में कमी नहीं आई। अमृतसर
के लिए पानी एवं बिजली की आपूर्ति बन्द कर दी गई। राह चलते लोगों
को बेंतों से पीटा जाता था, उन्हें छाती के बल रेंगकर चलने के लिए विवश
किया जाता था। सैनिक कानून के अन्तर्गत दुकानों में वस्तुओं के भाव
सैनिकों की इच्छा के अनुसार तय किये जाते थे। सैकड़ों लोगों को गिर-
फ्तार करके जेलों में भेजा गया था।
पंजाब के गवर्नर माइकल ओडायर ने जनरल डायर के इस कार्य की
प्रशंसा की थी। सैनिक शासन के इन अत्याचारों का वर्णन श्री मन्मथनाथ