अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा
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चन्द्रशेखर आजाद 17
राजनीति में महात्मा गांधी का पदार्पण हो चुका था। इसके साथ ही
भारत भर में क्रान्तिकारियों की गतिविधियाँ भी बढ़ने लगी थीं। अंग्रेजी
सरकार ने भारतीयों का दमन करने के लिए एक समिति बनायी, जिसके
अध्यक्ष जस्टिस ए० एस० टी० रौलेट थे तथा इसमें निम्नलिखित चार
अन्य सदस्य थे।
- बेसिल स्कॉट, मुख्य न्यायाधीश, बम्बई उच्च न्यायालय।
- कुमार स्वामी शास्त्री, न्यायाधीश, मद्रास उच्च न्यायालय।
3 बर्ने लावेट, बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, यू० पी० के सदस्य। - प्रभातचन्द्र मित्र, अधिवक्ता उच्च न्यायालय कलकत्ता।
इस समिति का गठन करते समय इसके दो उद्देश्य बताये गये थे—
भारत में क्रान्तिकारी गतिविधियों के विषय में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त
करना तथा इन्हें दबाने के लिए कानून बनाना।
स्पष्ट है कि इसका उद्देश्य भारतीयों की स्वतन्त्रता की आवाज को
दबाना था, किन्तु सरकार का तर्क था कि सुधारों के लिए इस समिति का
गठन किया गया था। यह समिति 10 दिसम्बर, 1917 को बनी थी। अन्त
में इसने दो सौ छब्बीस पृष्ठों की अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। भारतीयों की
स्वतन्त्रता एवं उनके अधिकारों को इस रिपोर्ट द्वारा और भी कम कर दिया
गया था। इस रिपोर्ट से केवल क्रान्तिकारी आन्दोलनों का ही दमन नहीं
होना था, वरन् इसका उद्देश्य राजनीतिक आन्दोलनों को दबाना भी था।
इस समिति का नाम 'सिडीशन' कमेटी था, अतः इसके माध्यम से राज-
नीतिक आन्दोलनों को भी राजद्रोह कहकर दबाया जा सकता था। यह
रिपोर्ट पुलिस के विचारों पर आधारित थी। इसमें गर्म दल के कांग्रेसियों
लोकमान्य बालगंगाधर तिलक, विपिनचन्द्र पाल आदि को तथा चाफेकर
बन्धुओं, खुदीराम बोस आदि क्रान्तिकारियों को एक समान माना गया
था। हिंसा तथा अहिंसा आदि का विचार नहीं किया गया था।
रौलेट कमेटी की सिफारिशें :
इस समिति ने पुलिस को विस्तृत अधिकार प्रदान कर दिये थे।
पुलिस जब और जिसे चाहे नजरबन्द कर सकती थी, गिरफ्तार कर सकती