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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 136, कुल 148 में से

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पृष्ठ 136

चन्द्रशेखर आजाद
के लिए उन्हें बार-बार तरह-तरह की प्रेरणा देते थे।—स्त्रियों से उनका
व्यवहार बड़ा सरल और आत्मीयतापूर्ण होता था। यह सब होते हुए भी
इस बात के घोर शत्रु थे कि कोई दल का सदस्य स्त्रियों के प्रति अनुचित
रूप में आकृष्ट हो, किसी प्रकार की यौन कमजोरी तो उनके लिए असह्य
थी। परन्तु पति-पत्नी दोनों क्रान्तिकारी कार्यों में लगें, इससे अधिक
अभीष्ट बात उनके लिए और कोई नहीं थी।"
यही नहीं भगतसिंह के प्रगतिशील विचारों से प्रभावित होकर उनके
खान-पान में भी परिवर्तन आ गया था। पारिवारिक संस्कारों से विशुद्ध
शाकाहारी ब्राह्मण होने पर भी अब वह अण्डे का सेवन करने लगे थे। इस
विषय में भी श्री भगवानदास ने उनके जीवन की एक घटना का उल्लेख
करते हुए लिखा है—
"खान-पान के सम्बन्ध में भी आजाद अपने व्यक्तिगत संस्कारों से
एक शाकाहारी ब्राह्मण ही थे। उनका छुआछूत का भूत पण्डित रामप्रसाद
'बिस्मिल' के नेतृत्व में काम करने के समय ही उतर गया था। एच० एस०
आर० ए० नेता के रूप में वह मांस आदि खाने के विरुद्ध तर्क विशेष नहीं
करते थे, मगर वह उन्हें अच्छा नहीं लगता था। शिकार वह खूब खेलते
थे, मगर स्वयं मांस नहीं खाते थे। राजा साहब नजिदाबाद के यहाँ मैं
तो शिकार भी करता था, और मुसलमानों का मांस भी खाता था, इस पर
वह मुझसे कुछ नाराज भी हुए थे। भगतसिंह उन्हें श्रमियों और क्षत्रियों
जैसे काम करने वालों के लिए मांस खाने की अभीष्टता, उपयोगिता और
नीतिमत्ता पर लेक्चर झाड़कर अक्सर चिढ़ाया करते थे। साण्डर्स वध के
समय जब आजाद ने मुझे लाहौर बुलाया तो मुझे यह देखकर विस्मय
हुआ कि आजाद पर भगतसिंह का जादू चल गया और पण्डितजी अध-
कच्चा अण्डा सीधा मुंह पर फोड़कर ही गटक रहे हैं। मैंने हैरानी से
पूछा—'प