अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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है। मैंने उनके बलिदान से लेकर आज तक उनके सम्बन्ध में बार-बार पढ़ा,
तथ्यों का संग्रह किया। 'अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद' उसी का परिणाम
है। मैं कह सकता हूँ कि इसमें जो बातें लिखी गई हैं, वे साधार एवं तथ्य-
पूर्ण हैं।"
स्पष्ट है कि श्री व्यथित हृदय ने अपनी पुस्तक की सामग्री की सत्यता
का दावा किया है, किन्तु पुस्तक में आजाद की वीरगति को प्राप्त होने की
तिथि 23 मार्च (अथवा 23 फरवरी) 1931 लिखी हुई है, जो सर्वथा
असत्य है, क्योंकि 23 मार्च, 1931 अमर शहीद भगतसिंह, राजगुरू तथा
सुखदेव का बलिदान दिवस है, न कि आजाद का।
सुखदेवराज इस घटना से कुछ समय पूर्व तक आजाद के साथ ही थे।
उनके अनुसार घटना का विवरण इस प्रकार है—
“27 फरवरी प्रातः जलपान करने के बाद जब मैं अपनी साइकिल से
चला तो भैया आजाद रास्ते में ही मिल गए। हम दोनों बातें करते-करते
पार्क की तरफ बढ़ चले। भैया मुझसे पूछ रहे थे कि चूंकि मैं बर्मा हो आया
हूँ, क्या मैं बता सकता हूँ कि कुछ लोग बर्मा के रास्ते देश से बाहर जा
सकते हैं। इस सन्दर्भ में मुझे जो जानकारी थी मैंने उन्हें दी। हम दोनों
बातें करते-करते पार्क में पहुँच गए। वहाँ एक व्यक्ति पुल के ऊपर बैठा
दातून कर रहा था। उसने आजाद को घूरना शुरू कर दिया। उसकी आँखें
देखकर आजाद को कुछ सन्देह हुआ। उन्होंने मुझसे उल्लेख किया। मैंने फिर
उस व्यक्ति की ओर देखा, किन्तु उसने अपना मुंह दूसरी ओर कर लिया।