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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 107

110 चन्द्रशेखर आजाद
पुलिस वालों ने उनके पाँव में एक गोली मारी तभी उसे हाथ लगाया।
आस-पास के लोगों को जब आज़ाद के घिर जाने का समाचार
मिला, तो कई लोग म्योर कालेज के सामने जा पहुँचे थे और इस घटना
को देखते हुए वहीं से 'आज़ाद ज़िन्दाबाद' के नारे लगा रहे थे। आज़ाद
के भूमि पर गिर जाने पर ही पुलिस वालों का ध्यान नारे लगाने वालों
की ओर गया, तब नाट रिवाल्वर लेकर उनकी ओर लपका। इस पर
लोग म्योर सेण्ट्रल कालेज तथा मुस्लिम हास्टल के परिसर की ओर भाग
गए। इस समय उसे आज़ाद के शव को ले जाने की जल्दी थी, अतः उसने
नारे लगाने वालों का अधिक पीछा नहीं किया और लौट गया। इसके
बाद पुलिस आज़ाद के शव को लारी में रखकर ले गई तथा घोषणा कर
दी कि आज़ाद पुलिस की गोलियों से मारे गए।
आज़ाद के अल्फ्रेड पार्क में होने की सूचना पुलिस को किसने दी, इस
विषय में विभिन्न मत व्यक्त किये गए हैं। कुछ पुस्तकों में लिखा मिलता
है कि यह सूचना वीरभद्र तिवारी ने दी तथा कुछ लोगों के अनुसार इलाहा-
बाद के एक सेठ ने यह सूचना दी थी। श्री मन्मथनाथ गुप्त ने स्पष्ट
रूप से तो वीरभद्र तिवारी द्वारा मुखबिरी किए जाने का उल्लेख नहीं
किया है, परन्तु उनके विचारों से यही जान पड़ता है कि वह यही कहना
चाहते हैं कि यह दुष्कर्म वीरभद्र तिवारी ने ही किया था। श्री गुप्त लिखते
हैं—