अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रशेखर आजाद 109
दौड़ते हुए उन्हें आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी। भला आजाद ऐसा
कैसे कर सकते थे। वह उठ खड़े हुए। उन्होंने नाट की चेतावनी का उत्तर
अपनी रिवाल्वर हाथ में लेकर दिया। नाट बावर ने गोली चला दी।
इस पर आजाद ने भी गोली चलाई। गोरे की गोली आजाद की टाँग में
लगी तथा आजाद की गोरे के कन्धे में। फिर दोनों ओर से गोलियां चलने
लगीं। सम्भवतः अन्य पुलिस भी आ गई थी। नाट बावर की कलाई घायल
हो गई। गोलियां लगातार चल रही थीं, किन्तु, कलाई घायल हो जाने
पर नाट बावर एक पेड़ की ओट में हो गया। आजाद भी घिसटते हुए
एक पेड़ की ओट में हो गए। उनके पास भी पर्याप्त गोलियाँ थी। उन्होंने
अपने साथी सुखदेवराज को गोलियाँ चलने पर वहाँ से भगा दिया था।
यद्यपि वह जाने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थे, किन्तु आजाद ने उनकी
एक भी नहीं सुनी और बलपूर्वक उन्हें वहाँ से भगा दिया था। अतः वह
पुलिस वालों पर अकेले गोलियाँ बरसाते रहे। नाट बावर के ओट में हो
जाने पर उसकी जगह पुलिस अधिकारी विशेश्वर सिंह ने ले ली थी।
आजाद ने उस पर निशाना साधा, इस निशाने से उसका जबड़ा टूट गया।
विशेश्वर सिंह को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। उसका जबड़ा
फिर कभी ठीक न हो सका और सेवाकाल समाप्त होने से पूर्व ही उसे
कार्य मुक्त कर दिया गया।