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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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४४८
( रीक्युल्स ३९२ : बम्बई ५८ )
दर शब रफ़्तने लोरक दर ख़ानये मैना व दिल खुश करदन ऊ
( लोरकका रात्रिमें मैनाके घर आना और मनोविनोद करना )
मैना घेरिहिं१ ले अन्हवाइ । मूँगिया सारि२ आन पहराइ ॥१
दुसरैं पाट नो पँसारसि३ । मुख तँबोल चख काजर सारसि ॥२
पदरीं इट जनु अनीस नीभरा४ । देख सुरुज चाँदा भीमरा५ ॥३
रात बाह कें नारि मनाइ । चाँदा चाह अधिक तँ पाइ ॥४
पहुल दुख जो नारि पखानों । राखसि मान लौर जम जानों ॥५
कइसि सुरुज धनि चाँदा, अस फन देउतहिं दोस६ । ६
इम मना जेंठ तरह, रहहि चाँद परास७ ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—गुफ़्त बादने कनीज़गान मर मैना रा व कस्कने ख़ास आबा
गन व दर ख़ाना शुदन (दासियोंका मैनाको महला कर वस्त्र पहराना
और मन बहलाव करना) ।
१—धरी । २—नारी । ३—ण बहि पंगारी । ४—गारी । ५—अहिन
निसरा । ६—सुरुज तब चाँदहिं दिखरा । ७—ठा । ८—चोदाँइ पाइ
अधिक पैमाइ । —पहिल । ९—कइसि सुरज धनि चाँदहि ण में
कीता दोस । १०—इमार षाँह इम तरह, रहतु चाँद परास ॥
४४९
( रीक्युल्स ३९३ )
गबर सुनानीदन आरुफ़ दर हजरे गाबर बज आमदन गु०
( लोरकका अपने आनेका समाचार गाबर भेजना )
गाररौँ अपवस पान जनाइ । भैंसों गगरभि नाहि मँसाइ ॥१
अजपी क घर गनिन गइ । रागि गुहार पान अस भइ ॥२
भा अमरार पाए दउराबा । तरफ गुनि क भ्रमन आवा ॥३