चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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दठर खाँड अभगी सर दीन्हौं । ठाठर टूटि लोर तिह चीन्हौं ॥४
वोहि उठि कै भये अँकवारा । [ - ] कै मैं तौं मारा ॥५
काहि लागि तूँ हाँकसु, उठहु आपुन पर आउ । ६
आगें दइ लोरक खेतस, छाहि पूत तुम्ह पाउ ॥७
४५०
( रीफ़न्सूल १२२ )
दर रसीदने आमदने लोरक ब खाने मादर उफ्तादन
( लोरकका अपने घर आकर माँके पैर पड़ना )
चढ़ तुरी लोर घर आवा । पायँ लागि के माइ मनावा ॥१
नित कहि अस पूत न कीजइ । भूरि माइ कँ दुख न दीजइ ॥२
खोलिन बहुतें डोल आनी । चाँदा मैना दोनौं रानी ॥३
पायँ परी अँकवारी घरी । काजर सेंदुर दोऊ फरी ॥४
अगिन परबार क रमोइ बघारा । कोठा बारी सेज सँबारा ॥५
चाँद सुरुज औ मैनाँ, बरस सहस भा राज । ६
गावहिं गीत सहेलियाँ, गोबर मघावा आज । ७
टिप्पणी—(४) काजर—काजल । सेंदुर—सिन्दूर ।
( ) बघारा—छौंका बघारा । कोठा—अट्टालिका । बारी—घर ।
४५१
( रीफ़न्सूल १२५ )
पुरसीदन लारक मादर रा व जवाब दादन मादर
( लोरकका माँस पूछना और माँका उत्तर देना )
लारक पूसहि कहु मई माई । कित धनि मैनाँ कितहुव भाई ॥१
तारैँ पाउ आपन आवा । बैनी मैना गाड़ी लावा ॥२
अजबी कर गगर उठ भारा । बैथी मैना आइ छुड़ारा ॥३