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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 363

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४—चाँदै हरखी। ५—चाँद। ६—को पै देखत चाँद को रामेरउँ ।
७—कारमुरी के खरग डिखावेउँ। ८—दाइ मैं। ९—दीन्हौं।
४४७
(रीडिंग्स ३२१ ; बम्बई ५०)
गुफ़्तगूए खुद नमूदन् चाँदा ब पैहानत करद्ने मैना
(चाँदका अपनी बड़ाई और मैनाका अपमान करना)
चाँद आपुन कियत बड़ाई। मैनहि पूछत रही लजाई ॥१
भोल पतोल भइ सुठाई¹। कहसि न चाँद कहाँ सँ² आई ॥२
परकी चाँदें झझ उषावा³। भा झझ अस दाउद गावा ॥३
तब उठि लारक आपु जनावा। मैनाँ रह[स⁴] लारेवो पावा⁵ ॥४
सोरफ चाँद⁶ तस कँ हरखी। जूसन फारन फिर न फरकी ॥५
घरि सात पाँच कइँ भोरुसि, मैना⁷ जाइ सँभारि ।६
आज रात मैनैं⁸ घर बामौं⁹, दाहिक हूँ¹⁰ पारि ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—गुफ़्तगू व एल्फिदम सुद शुफ्तन चाँदा व शनाख्तने मिन्द व
बज़ बर्दन चाँदा (चाँदका अपनी प्रशंसा करना; मैनाका उसे पहचान
लेना और झगड़ना) ।
इस प्रतिमे पंक्ति ४ नहीं है। उसके स्थानपर पंक्ति ७ है और पंक्ति ५
के स्थानपर एक नयी पंक्ति है।
—कवत वकत भइ सुन्दाई। १—हुत । ३—उगावा । ४—भई।
यह पंक्ति नहीं है। ६—चाँदहि। ७—हरषी। ८—चाँदा जूसे
न फिरि न फहकी । —मैनाँद । ९ —मै बहि। ११—उठव ।
१२ राउदेवै करा
सातवीं पंक्ति के स्थानपर नयी पंक्ति इस प्रकार है—भवहु तमुझ महि रही
जगाइ। आपुन घर कँ कीन्ह बड़ाई ॥