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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 362

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४४५
(रीड्स ३२ अ)
ऐजन
(वही)
पिरम समुँद अति अवगाहा। जो अग बूड़ि न पावइ थाहा ॥१
चहुँ दिसि कैसैं थाह न पावइ। मानुस बूड़ै तीर न आवइ ॥२
मोरे रोयैँ साबर भये। धरती पूर सरग लहि गये ॥३
फूटि आँख जनु आँसू भये। पँथ सो छोड़ पानि न रहै ॥४
यह गुन हाँ तौरैँ न देखेउँ। रात चाँद दिन सुरुज देखेउँ ॥५
जान देइ पर आपुन, मोरहि सास मुहि माइ ।६
पिय सँताप सुन पैठउँ, काल पास तुम आइ ॥७
४४६
(रीड्स ३२ अ। बम्बई ५९)
बाज रफ्तने मैना दर बेगाँ बा सहेलियान खुद
(मैनाका सहेलियोंके साथ बंगासे वापस जाना)
उदये भानु औ रात' बिहानी। महरी देखहा जाइ' तुलानी ॥१
मैनाँ देखत मंदिर भुलाइ। बहुरि चाँद वह बात चलाइ ॥२
कहु कँह मैनाँ सुरुज' अस करा। सो लै चाँदहि पाटन घरा ॥३
मई तज सुरुज चाँद लै भागा। परहाँ माँस' आइ अब लागा ॥४
जो कहुँ चाँद हौँ पाऊँ। फार कें मुँह नगर फिराऊँ ॥५
जस पैँ प्रीत सँझाइ, तम जग करै न कोइ ।६
जइस दाह महि दीन्हों , यइस दाह यहि होइ ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक—बज शवे सुवह शद रोशन बरामदने ब बेरलीने मैना ब
बरलीन्मे चाँदा (सुवह होने पर मैनाका आना और चाँदका बुझाना)
१—भानु रात बिहानी। २—भार। ३—कहु में सुरुज चाँद।