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सर्वकोश
चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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११
(२) करे—करने ।
(३) बाँइ—पति ।
(४) जौंकहि—जब तक। मूँहिका—मुझको । तौंसहि—तब तक ।
अस—ऐसा । साथ—आकाश ।
(५) बटाथी—घट गयी । चक्र—नेत्र ।
४४४
(रीडंग्इस ११५ होकर)
ऐकन
(वही)
तोरफ मैनाहि बान न देइ । करै धमारी मरम सभ लेइ ॥१
मैना कहइ सुन साँझि¹ सँझाइ । मोरें आइ भीत रजाइ² ॥२
मैं का देरउ हा बेसादरी । तिह तँ माँ सों करसि धमारी ॥३
आनसि अस मैं सोवा सारी । थाप देइ महि पाठसि चोरी ॥४
अपने नाँह न रहँसु सँझाइ । मोर ठाँउ का करसु पड़ाइ⁵ ॥५
क्रोध भर कै मैना चली, तहँ पहेरु आवास⁶ ।६
साँदा भई पर⁷ पालंग ऊपर⁸, धरि मैं सारस पास⁹ ॥७
पाठांन्तर—इतर प्रति —
शीर्प—नीज गुजराउने नौरक भर मैना रा बेसाजी व लग हरियाफ्त
करदन (नोरकका मैनाको न जाने देना और छेडखानी करना)
१—खरे । २—गह । ३—नभारं । ४—ते ४ शैरी मैं अद्विम
कुमारी । ५—डर ते महि मा । ६—तै मारी मारी । ७—एकत्र ।
८—भम्ने मान । —मोर ठाँउ पुर रहि म सहाइँ । ९—फोर बहुत
दे मिना चल मह वह के आवास । ११—साँदा पर पर्यंग माँ ।
टिप्पणी— (१) धमारी—दवा पोकडी छेडछार हुड़दंग । मरम—हृदयकी बात ।
(३) बेसादरी—बेंगाइनि ।