चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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(सदा १४४८)
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- न दिलन का पौटा
(विरहका और के रूप क्रम)
पिरख नारि भा समुझाइ । गोद जीउ पेन पँहुचि सिरिआइ ॥१
चन्दन अमिर पिम मन मारा । परसि गपा भरि भीम गुँभारा ॥२
सिन्धु माँग नग साउर टीको। पग पान मुख पीग दीको ॥३
अछन पहिरि भउ गिय हार । हाथहि मेहँदी हिंया सिंगारु ॥४
अपर रूपे मदन भइ । भए लागि मानिन पर गइ ॥
उमगह नहगह निसि पायी, गरुह जा भाउ निहग ॥६
पउज मय पान फूलउ, भयी दुरँग दुरग ॥७
[टि०-] (१) म०नि० पृ० ६५१ ।
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(संवत् १४४९)
- न दिलन का पौटा
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- न लउतन्ह दिलन को प०८ ख
(दिल्हन के भँवर के रूप क्रम के ० ख०)
दिन का विरह भा तुयानी । भा उधारा पँचौ गनी ॥१
भए तेवँइ सिखा परा। गए सोइ मानिन घर आए ॥
सेंधुरा भा कंचु सुधार । विरख करै। गुयन निहार ॥३
विरहन दून भए पर भार । आग भइ पनि साही मार ॥४
आग्य बरइ न बुझावइ । तँह अगन भए अंगल जरइ॥
भए घरा सउर पुनि मँदा । सब जन पाइ रह खंदा ॥६
भए दिलन विरह उन सुखभन्ह कइ ।७
- न लउतन्ह दिलन को प०८ ख