चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४
सरद सिसिर रितु हँवन्त, जात न लागे बार ।६
चलब चाँद कहु बिहफइ, होइ बसन्त उजियार ॥७
टिप्पणी—(२) रहउ—देख॰ बादल ।
(६) बार—नाला ओर—गोइ ।
(७) चळब—चलूँगा । बिहफइ—'बँसिरइ' पाठ भी सम्भव है। दोनो ही
विरस्पत (बृहस्पति) के देशज रूप हैं।
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( रीछण्डस ३३५ )
तहफ़ीम कर्दने विरहसत बर गोरक रा
( बिरहसत का गोरक को समझाना )
बिहफइ आइ लोर समुझावा । बेर चाँद बिउ रूप उषावा ॥१
छाइ गोबर अस पहराउप । अरु जिउ आइ फुनि गोइ [न*] आउष॥२
मैं आपुन जिउ अस परसेना । रात दवस कहुँ बरमी दबा ॥३
पित्वैं फेर देखि पासाऊ । हाथ ऊभि सुइँ पर न पाऊ ॥४
परु गहि पानि अगका कहिय । अइस परे सर तइमै महिये ॥५
कहा बार सुनु बिहफइ, हौं ता रागि गुनाउँ ।६
काल घरी हौं जानब, धौं हा चाँद पुलाउँ ॥७
टिप्पणी—(१) बेर—डिम्ब ।
(२) अइस—इस प्रकार । पहराउब—बाहर निकलूँगा । गोइ—गोंदकी
गाँथा । आउष—आउँगा ।
( ) पानि—पाना, हाथ । अहूय—रेता । परइ—पड़ । तइम—तवा ।
(७) बाल—बर । धौं—सम्पूर्ण ।
२८२-२८६
( अनुपलब्ध )